उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय और दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी को सौंपी 35 एकड़ भूमि
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के शैक्षिक परिदृश्य में शनिवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने नरेला में 35 एकड़ से अधिक डीडीए भूमि का कब्जा औपचारिक रूप से गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) और दिल्ली टीचर्स यूनिवर्सिटी (DTeU) को सौंप दिया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री आशीष सूद विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य नरेला को एक आत्मनिर्भर 'सब-सिटी' और विश्वस्तरीय 'एजुकेशन हब' के रूप में विकसित करना है। नए परिसरों की स्थापना से न केवल दिल्ली के उच्च शिक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, बल्कि बाहरी दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के छात्रों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के द्वार खुलेंगे। एलजी ने इस अवसर पर कहा कि यह कदम नरेला को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक मॉडल उप-शहर बनाने के डीडीए के प्रयासों को गति प्रदान करेगा।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने जानकारी दी कि भूमि का आवंटन जनवरी 2024 में ही कर दिया गया था लेकिन पिछली सरकार के दौरान यह परियोजना अधर में लटकी रही। आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने विश्वविद्यालयों के भूमि संबंधी अनुरोधों को नजरअंदाज किया और भुगतान करने से इनकार कर दिया था। गत वर्ष नई सरकार के कार्यभार संभालने के बाद इस दिशा में तेजी से काम हुआ। सरकार ने अपने पहले ही बजट में भूमि खरीद के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया। इस जमीन के एवज में दिल्ली सरकार ने डीडीए को 452 करोड़ का भुगतान कर दिया है. जबकि, वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट अनुमान में 500 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुका है।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार विजन को क्रियान्वयन में बदलने के लिए संकल्पित है। उन्होंने रेखांकित किया कि ये नए कैंपस केवल इमारतें नहीं, बल्कि दिल्ली के उज्ज्वल भविष्य और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की नींव हैं। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि नरेला एजुकेशन सिटी में केवल इमारतें नहीं होगी, बल्कि यह ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित एक साझा (शेयरड) कैंपस मॉडल होगा, जिसमें आधुनिक लाइब्रेरी, अत्याधुनिक लैब्स, सेमिनार हॉल, ऑडिटोरियम और रिसर्च व इनोवेशन सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो और अधिक से अधिक छात्रों को इन सुविधाओं का सीधा लाभ मिल सके। नरेला में बनाये जा रहे विश्वविद्यालय परिसरों में फैकल्टी और स्टाफ के लिए एलआईजी, एमआईजी, एचआईजी और ईडब्ल्यूएस के फ्लैट के रूप में आवासीय सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। साथ ही नरेला में विकसित होने वाले इन परिसरों में अत्याधुनिक डिजिटल लर्निंग सुविधाएं, शोध प्रयोगशालाएं और खेल परिसर होंगे। साझा सुविधाओं (जैसे लाइब्रेरी और ऑडिटोरियम) के उपयोग से संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने की योजना है। इस पहल से नरेला में फुटफॉल बढ़ेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास को भी नई दिशा मिलेगी। विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा फ्लैट्स, हॉस्टल और अन्य सुविधाओं के निर्माण पर लगभग 567 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
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