गाजियाबाद में अवैध होटल और कोचिंग सेंटर बने खतरे की घंटी

कागजों में जांच, जमीनी हकीकत में धड़ल्ले से चल रहे अवैध प्रतिष्ठान
फायर सेफ्टी पर बड़ा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

गाजियाबाद।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में होटलों की जांच अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि गाजियाबाद में चल रही जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि जिले में बड़ी संख्या में होटल, गेस्ट हाउस और कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि गाजियाबाद के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे होटल संचालित हो रहे हैं, जिनके पास आवश्यक लाइसेंस और अनुमतियां नहीं हैं। आरोप है कि कई होटल सराय अधिनियम के तहत आवश्यक पंजीकरण के बिना ही संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा अनेक होटलों में फायर सेफ्टी के मानकों का भी पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। 
बताया जा रहा है कि कई होटल मात्र 100 वर्ग गज या उससे कम क्षेत्रफल में संचालित हो रहे हैं, जबकि सुरक्षा मानकों के अनुसार पर्याप्त निकास मार्ग, अग्निरोधक दरवाजे और आपातकालीन व्यवस्था होना आवश्यक है। ऐसे भवनों में आग लगने की स्थिति में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने में गंभीर कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
केवल होटल ही नहीं, बल्कि आवासीय फ्लैटों और छोटे भवनों में संचालित कोचिंग सेंटर और निजी विद्यालय भी चिंता का विषय बने हुए हैं। शहर के कई इलाकों में 50 से 100 वर्ग गज के भवनों में आठवीं कक्षा तक के स्कूल और कोचिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचते हैं। अधिकांश स्थानों पर फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के आरोप हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अग्निशमन विभाग और जिला प्रशासन ने कभी ऐसे कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अक्सर किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन सक्रिय होता है और जांच अभियान शुरू किए जाते हैं। इसके बाद कुछ दिनों तक कार्रवाई चलती है और मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है। नागरिकों का मानना है कि होटल, स्कूल, कोचिंग सेंटर और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की नियमित जांच, फायर एनओसी का सत्यापन तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके। अन्यथा किसी भी दिन सुरक्षा में लापरवाही बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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