15 लाख रुपये लेकर मुकदमा दर्ज कराने, घरों में कथित तोड़फोड़, महिलाओं से अभद्रता, अवैध हिरासत और 5 लाख रुपये लेकर छोड़ने के आरोप; सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
गाजियाबाद। थाना शालीमार गार्डन में दर्ज मुकदमा संख्या 0302/2026 को लेकर एक पीड़ित परिवार ने पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिवार ने थाना पुलिस पर उत्पीड़न, घरों पर दबिश, महिलाओं के साथ कथित अभद्रता, तोड़फोड़, अवैध हिरासत और कथित भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। बी 185 शालीमार गार्डन मैन निवासी रामजीत चौधरी ने मामले की जांच स्थानीय थाना पुलिस से हटाकर किसी वरिष्ठ एवं निष्पक्ष अधिकारी या अन्य जांच एजेंसी से कराने की मांग की है।पुलिस आयुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र में रामजीत चौधरी ने कहा है कि थाना शालीमार गार्डन में वेद प्रकाश नामक व्यक्ति की शिकायत पर कृष्ण भाटी एवं अन्य के विरुद्ध मुकदमा संख्या 0302/2026 दर्ज किया गया है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों और पूरे घटनाक्रम को देखते हुए मुकदमा संदिग्ध प्रतीत होता है। पीड़ित परिवार का दावा है कि शिकायतकर्ता वेद प्रकाश और कृष्ण भाटी पूर्व में मित्र रहे हैं और कृष्ण भाटी को वेद प्रकाश द्वारा कथित रूप से की जा रही जीएसटी चोरी की जानकारी हो गई थी, जिसके बाद वेद प्रकाश ने कथित तौर पर कृष्ण से बदला लेने और उसे दबाव में लेने के उद्देश्य से साजिश रचकर झूठे आरोप लगाए तथा पुलिस से मिलीभगत कर मुकदमा दर्ज कराया। इस मुकदमे में कृष्ण भाटी के अलावा सौरव चौधरी, आकाश भाटी, सोनू और ननू को भी आरोपी बनाया गया है।
शिकायत में शालीमार गार्डन थाने के एसएसआई धर्मवीर पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि एसएसआई धर्मवीर द्वारा शिकायतकर्ता वेद प्रकाश से कथित रूप से 15 लाख रुपये लेकर मुकदमा दर्ज कराने की बात सामने आई है। परिवार ने इस आरोप की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
परिवार का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा आरोपियों और उनके परिवारों को लगातार परेशान किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, 18 अगस्त 2026 को कृष्ण भाटी के घर पहुंचकर उनकी मां श्रीमती सविता के साथ कथित रूप से अभद्रता और गाली-गलौज की गई। इसी प्रकार 19 अगस्त 2026 को सौरव चौधरी की विधवा मां श्रीमती पूजा चौधरी के घर पहुंचकर कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मी घर में घुस गए और घर का सामान फेंकने तथा तोड़फोड़ करने जैसी कार्रवाई की। रामजीत चौधरी ने दोनों घटनाओं के संबंध में घरों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि फुटेज की जांच से घटनाओं की वास्तविकता सामने आ सकती है।
शिकायत में 25 अगस्त 2026 की रात जवाहर पार्क स्थित सोनू के घर पुलिस टीम के पहुंचने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, एसएसआई धर्मवीर और अन्य पुलिसकर्मियों ने सोनू के घर के आसपास कई घरों के गेट बंद कर दिए। आरोप है कि सोनू की बहनों काजल और कोमल तथा उनकी मां श्रीमती गेंदावती के मोबाइल फोन ले लिए गए और घर में सामान फेंकने एवं तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई की गई। परिवार ने कहा कि पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की संभावना है। उन्होंने पुलिस आयुक्त से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित कराने और आसपास के पड़ोसियों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कराने की मांग की है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आकाश भाटी के घर पर भी पुलिसकर्मी दिन-रात तैनात रहते हैं और बार-बार उनके घर एवं कार्यालय पर दबिश दी जा रही है। रामजीत चौधरी का कहना है कि इससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस मुकदमे में कार्रवाई की जा रही है, उसमें इतनी गंभीर धाराएं नहीं हैं कि पुलिस द्वारा कथित रूप से परिवारों के घरों में तोड़फोड़ और इस प्रकार की कार्रवाई की जाए। प्रार्थना पत्र में अनुज चौधरी के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, अनुज चौधरी को 23 अगस्त 2026 को गौतमबुद्ध नगर से उठाकर थाना शालीमार गार्डन की करन गेट चौकी लाया गया। आरोप है कि वहां उसे मुकदमे में 10 वर्ष की सजा होने की धमकी दी गई और कहा गया कि उसके खिलाफ लगाई गई धारा 308(2) को बढ़ाकर 308(5) कर दिया गया है।
परिवार का आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा आरोपियों और उनके परिवारों को लगातार परेशान किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, 18 अगस्त 2026 को कृष्ण भाटी के घर पहुंचकर उनकी मां श्रीमती सविता के साथ कथित रूप से अभद्रता और गाली-गलौज की गई। इसी प्रकार 19 अगस्त 2026 को सौरव चौधरी की विधवा मां श्रीमती पूजा चौधरी के घर पहुंचकर कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मी घर में घुस गए और घर का सामान फेंकने तथा तोड़फोड़ करने जैसी कार्रवाई की। रामजीत चौधरी ने दोनों घटनाओं के संबंध में घरों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि फुटेज की जांच से घटनाओं की वास्तविकता सामने आ सकती है।
शिकायत में 25 अगस्त 2026 की रात जवाहर पार्क स्थित सोनू के घर पुलिस टीम के पहुंचने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, एसएसआई धर्मवीर और अन्य पुलिसकर्मियों ने सोनू के घर के आसपास कई घरों के गेट बंद कर दिए। आरोप है कि सोनू की बहनों काजल और कोमल तथा उनकी मां श्रीमती गेंदावती के मोबाइल फोन ले लिए गए और घर में सामान फेंकने एवं तोड़फोड़ जैसी कार्रवाई की गई। परिवार ने कहा कि पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड होने की संभावना है। उन्होंने पुलिस आयुक्त से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित कराने और आसपास के पड़ोसियों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कराने की मांग की है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि आकाश भाटी के घर पर भी पुलिसकर्मी दिन-रात तैनात रहते हैं और बार-बार उनके घर एवं कार्यालय पर दबिश दी जा रही है। रामजीत चौधरी का कहना है कि इससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस मुकदमे में कार्रवाई की जा रही है, उसमें इतनी गंभीर धाराएं नहीं हैं कि पुलिस द्वारा कथित रूप से परिवारों के घरों में तोड़फोड़ और इस प्रकार की कार्रवाई की जाए। प्रार्थना पत्र में अनुज चौधरी के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, अनुज चौधरी को 23 अगस्त 2026 को गौतमबुद्ध नगर से उठाकर थाना शालीमार गार्डन की करन गेट चौकी लाया गया। आरोप है कि वहां उसे मुकदमे में 10 वर्ष की सजा होने की धमकी दी गई और कहा गया कि उसके खिलाफ लगाई गई धारा 308(2) को बढ़ाकर 308(5) कर दिया गया है।
रामजीत चौधरी के अनुसार, अनुज को 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रखा गया और बाद में कथित रूप से 5 लाख रुपये लेकर छोड़ दिया गया। परिवार ने इस मामले में सीसीटीवी फुटेज, जीडी/डीडी एंट्री तथा अन्य पुलिस रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित 5 लाख रुपये के लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। पीड़ित रामजीत चौधरी और उनके परिवार ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि वेद प्रकाश और कृष्ण भाटी के बीच पूर्व संबंधों तथा विवाद की वास्तविकता की जांच कराई जाए। इसके अलावा मुकदमा दर्ज कराने के लिए कथित 15 लाख रुपये के लेन-देन की भी निष्पक्ष जांच की जाए। 18 अगस्त को कृष्ण भाटी के घर और आसपास तथा 19 अगस्त को सौरव चौधरी के घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराने की मांग की गई है। इसी तरह 25 अगस्त की रात सोनू के घर के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कराकर जांच कराने, पीड़ित परिवारों, पड़ोसियों और प्रत्यक्षदर्शियों के स्वतंत्र बयान दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता रामजीत चौधरी ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि अनुज चौधरी को 23 अगस्त को कहां से, किस आधार पर और कितने समय तक पुलिस हिरासत में रखा गया, इसकी भी जांच कराई जाए। साथ ही कथित 5 लाख रुपये के लेन-देन की जांच कर दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार ने कहा है कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी द्वारा पद के दुरुपयोग, अवैध हिरासत, मारपीट, अभद्रता, धमकी, भ्रष्टाचार या अन्य अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। यह भी मांग है कि जांच पूरी होने तक आरोपियों और उनके परिवारों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए तथा मामले से जुड़े सभी सीसीटीवी फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कराया जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
Tags
गाजियाबाद