पुरानी सीमापुरी में खाकी का 'अंधेरा': डीडीए मार्किट में डंके की चोट पर चल रहा शराब पिलाने का अवैध कारोबार

मार्किट के कारोबारियों के लिए काम करना हुआ मुश्किल, पुलिस से शिकायत करने पर मिल रही जान से मारने की धमकी, शिकायत के बाद बढ़ाई गई उगाही की रकम: सूत्र

नई दिल्ली
 राजधानी दिल्ली के शाहदरा जिला में पुरानी सीमापुरी स्थित डीडीए मार्केट कारोबारियों के वर्कप्लेस के बजाय मयखाने में तब्दील हो गई है। जहां एक तरफ इस मार्किट में व्यापारी अपने परिवार के लालन-पालन के लिए मेहनत की कमाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नियमों को ताक पर यहाँ कई दुकानें अवैध कैंटीन बन गई हैं जिनमें अवैध रूप से शराब पिलाने का कारोबार फल-फूल रहा है।यह अवैध कारोबार पुलिस चौकी से चंद दूरी पर इस मार्किट में हो रहा है। यही वजह है कि पूरी मार्किट शाम को मयखाने में तब्दील हो जाती है।
मामले का सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब बीती 14 जुलाई को पुरानी सीमापुरी की डीडीए मार्केट के परेशान दुकानदारों ने एकजुट होकर थाना सीमापुरी में एसएचओ को सम्बोधित एक शिकायती पत्र दिया। पीड़ित दुकानदारों ने शिकायत में साफ तौर पर कहा कि वे इस मार्केट में अपनी दुकानें चलाकर किसी तरह अपने बच्चों का पेट पालते हैं, लेकिन इसी मार्केट में कई दुकानदारों ने अवैध रूप से कैंटीन खोल रखी हैं। ये कैंटीन संचालक दुकानों के अंदर और बाहर सार्वजनिक जगह पर पूरी तरह कब्जा जमाकर शाम को शराबियों को खुलेआम शराब पिलाते हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जब भी उन्होंने इस अराजकता का विरोध किया या कैंटीन बंद करने को कहा, तो दबंग कैंटीन संचालकों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। दबंगों का बेखौफ अंदाज इस बात से जाहिर होता है कि वे दुकानदारों को खुलेआम कहते हैं कि तुम्हें जहां शिकायत करनी है करो, हमें प्रशासन की मदद हासिल है और हम इसी तरह शराब पिलाएंगे।
इस अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रमुख दुकानदारों में शॉप नंबर 41-42 के वीएस मोटर्स संचालक, शॉप नंबर 104 के साहिल ऑटो पार्ट्स, शॉप नंबर 100-101 के विनोद ऑटो पार्ट्स, शॉप नंबर 7-8 के एसआर ऑटो इंजीनियरिंग, शॉप नंबर 103 के मोमीन मिस्त्री, शॉप नंबर 80 के सोनू वेल्डिंग, शॉप नंबर 40 के गणेश सर्जिकल, शॉप नंबर 25 के परमजीत सिंह चंदोक और शॉप नंबर 35 के कृष्णा ऑटो सेंटर के संचालक शामिल हैं। इन सभी व्यापारियों ने मांग उठाई कि जल्द से जल्द इन अवैध कैंटीनों के खिलाफ कार्रवाई करके इन्हें बंद कराया जाए और इसे चलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
लेकिन असली चौंकाने वाला पहलू पुलिसिया कार्यशैली को लेकर सामने आया है। जब सीमापुरी थाना पुलिस द्वारा इस शिकायती पत्र पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो निराश दुकानदारों ने क्षेत्र के एसीपी को पत्र लिखकर गुहार लगाई। इसके बाद जब दुकानदारों ने कार्रवाई की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी, तो जांच अधिकारी (आईओ) ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि कैंटीन का चालान कर दिया गया है। 
इतना ही नहीं, जांच अधिकारी ने लाचारी जताते हुए यहां तक कह दिया कि ये कैंटीन की दुकानें कई वर्षों से चल रही हैं, इसलिए वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते। शिकायतकर्ता दुकानदारों का कहना है कि पुलिस चौकी से महज 500 मीटर की दूरी पर डीडीए मार्किट में अवैध रूप से शराब पिलाई जा रही है, फिर भी पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। यह स्थिति पुलिस प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
इस पूरे प्रकरण में बीती 12 अगस्त को एक नया मोड़ तब आया जब शिकायत करने वाले एक व्यापारी को सीधी जान से मारने की धमकी दे दी गई। वीएस मोटर्स की शॉप चलाने वाले पीड़ित दुकानदार मोहित शर्मा का कहना है कि 14 जुलाई को की गई शिकायत को वापस लेने के लिए नदीम नाम का दबंग लगातार उन पर दबाव बना रहा है और उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहा है। दबंग ने शिकायतकर्ता को धमकाते हुए कहा कि तुम गीता कॉलोनी से आते हो, बीच रास्ते में तुम्हारा बहुत कुछ बिगड़ सकता है। साथ ही दबंग ने शेखी बघारते हुए कहा कि जो कैंटीन पुलिस से बंद कराई गई थीं, उन्हें हमने दोबारा शुरू करवा दिया है। इस सीधी धमकी के बाद पीड़ित मोहित शर्मा ने सीमापुरी एसएचओ से अपने जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए अवैध कैंटीनों को तुरंत सील करने की मांग की है।
सूत्रों का दावा—दुकानदारों से हर माह वसूले जा रहे 4,000 रूपए, नसीम के जरिए रकम पहुंचाने का आरोप: पुरानी डीडीए मार्केट में अवैध शराब पिलाने के कारोबार को लेकर अब बीट नंबर 5 पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, नसीम नामक व्यक्ति कथित तौर पर दुकानदारों से हर माह रकम एकत्र करता है और यह पैसा थाना सीमापुरी के बीट नंबर-5 में तैनात हेड कांस्टेबल अमित कुमार तक पहुंचाए जाने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार, पहले प्रत्येक दुकान से कथित तौर पर 3,500 रूपए प्रतिमाह लिए जाने की बात सामने आ रही थी। शिकायत के बाद यह रकम बढ़ाकर 4,000 रूपए प्रतिमाह प्रति दुकान कर दी गई है। चर्चा यह भी है कि अवैध शराब पिलाने की गतिविधियों को लेकर शिकायत किए जाने के बाद दुकानदारों पर कथित आर्थिक दबाव और बढ़ गया। आरोप है कि शिकायत से पहले जहां 3,500 रूपए प्रतिमाह लिए जाते थे, वहीं अब 500 रूपए और बढ़ाकर 4,000 रूपए कर दिए गए हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल अवैध गतिविधियों के संरक्षण का गंभीर मामला होगा, बल्कि पुलिस की निगरानी और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा। कुल मिलाकर इस पूरे मामले पर उच्चाधिकारियों को गंभीर होकर जांच कराने की जरूरत है।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने