एक ही पोर्टल पर मिलेंगी कई मंजूरियां, केंद्र की मंजूरी के बाद लागू होगा कानून
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने राजधानी में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026’ के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार का दावा है कि नए कानून से कारोबार शुरू करने और संचालित करने की प्रक्रिया सरल, तेज, पारदर्शी और किफायती होगी।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कारोबारियों को लाइसेंस, पंजीकरण और विभिन्न सरकारी अनुमतियों के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए एकीकृत ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कारोबारी एक ही ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भवन नक्शे की मंजूरी, अग्निशमन विभाग की एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमति तथा पानी, सीवर और बिजली कनेक्शन जैसी विभिन्न सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC) को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
कम जोखिम वाले कारोबार में सेल्फ-डिक्लेरेशन की सुविधा: सरकार ने कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए प्रक्रिया को और आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है। बिल की अनुसूची-3 में शामिल कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए ‘स्व-घोषणा’ (सेल्फ-डिक्लेरेशन) के आधार पर कारोबार शुरू करने की सुविधा दी जाएगी। कुछ मामलों में आवेदन के साथ ही लाइसेंस अथवा अनुमति जारी करने का प्रावधान होगा। वहीं, जिन सेवाओं के लिए निर्धारित समय-सीमा होगी, उस अवधि में संबंधित अधिकारी द्वारा निर्णय नहीं लिए जाने पर डीम्ड अप्रूवल यानी स्वतः वैधानिक मंजूरी का प्रावधान किया जाएगा।
जीएसटी, एफएसएसएआई पंजीकरण वालों को राहत: प्रस्तावित कानून में अनुपालन का बोझ कम करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार के मुताबिक, जो उद्यम पहले से जीएसटी, एफएसएसएआई, एमएसएमई या श्रम संहिताओं के तहत पंजीकृत हैं, उन्हें अलग से ट्रेड लाइसेंस अथवा दुकान एवं प्रतिष्ठान पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा ‘एक बार जानकारी’ (Once Only) के सिद्धांत के तहत सरकार के पास पहले से उपलब्ध दस्तावेज या जानकारी को दोबारा मांगने से बचा जाएगा।
पहले तीन साल सामान्य निरीक्षण से राहत: नए उद्यमों के लिए शुरुआती तीन साल को भी आसान बनाने का प्रस्ताव है। इस अवधि में सामान्य निरीक्षण नहीं किए जाने की व्यवस्था रखी गई है। हालांकि, नियमों के उल्लंघन, शिकायत या अन्य निर्धारित परिस्थितियों में संबंधित कार्रवाई का प्रावधान कानून के तहत रहेगा।सरकार ने ‘नेगेटिव लिस्ट’ आधारित व्यवस्था अपनाने का भी प्रस्ताव रखा है। इसका अर्थ है कि प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियों को सामान्य तौर पर अनुमति योग्य माना जाएगा। सरकार का मानना है कि प्रस्तावित कानून से दिल्ली में कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब ‘दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026’ को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद आवश्यक संवैधानिक एवं विधायी प्रक्रिया पूरी होने पर कानून लागू किया जा सकेगा।
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