जीडीए की तरफ से कराए गए सर्वे में सामने आई यह जानकारी
गाजियाबाद। दिल्ली की सीमा पर बसे जिस तुलसी निकेतन का कायाकल्प करने में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण जुटा है उसके 2292 फ्लैटों में 1500 लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। जीडीए की तरफ से कराए गए सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और एनबीसीसी के बीच इसे पुनर्विकसित करने के लिए समझौता पत्र पर साइन होने के बाद पात्र लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। प्राधिकरण की ओर से अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कार्रवाई करने के लिए तैयारी की जा रही है। इन लोगों में कोई किरायानामा बनवाकर रह रहा है, तो कोई पावर ऑफ अटार्नी पर और कोई तो बिना किसी वैध दस्तावेज के तुलसी निकेतन में निवास कर रहा है। जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक प्राधिकरण की ओर से ऐसे 1500 लोगों को चिह्नित किया गया है, जो बिना किसी वैध आधार के तुलसी निकेतन के फ्लैटों में रह रहे हैं। जीडीए की ओर से आवंटित फ्लैट धारकों को ही किराया और नया फ्लैट तैयार होने के बाद मिल सकेगा।जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार एनबीसीसी इसे पुन: विकसित करेगा। यह प्रोजेक्ट दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में एमओयू साइन होने के आठ सप्ताह में एनबीसीसी जीडीए को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपेगा। इसमें परियोजना का क्रियान्वयन मॉडल का आकलन होगा। दूसरे चरण में शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर (विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जाएगी। यह पीपीपी माडल पर विकसित होगा। जीडीए ने वर्ष 1989-90 में 7.83 हेक्टेयर भूमि पर तुलसी निकेतन योजना विकसित की थी। इसमें 2004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी सहित कुल 2,292 फ्लैट बनाए गए थे। साथ ही 60 दुकानें भी आवंटित की गईं। वर्तमान में यहां 20 हजार से अधिक लोग निवास कर रहे हैं।
आवंटियों को तीन साल का दिया जाएगा किराया
प्राधिकरण की ओर से तुलसी निकेतन में रहने वाले आवंटियों को तीन साल का किराया दिया जाएगा। ताकि वह तुलसी निकेतन के पुनर्विकसित होने तक आराम से अपना जीवनयापन कर सकें। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से आवंटियों से वार्ता की जा रही है। ताकि आने वाले दिनों में योजना को विकसित करने में किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े।
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