दिल्ली जन विश्वास विधेयक' को रेखा सरकार की कैबिने से मिली मंजूरी

छोटे अपराधों से मुक्ति की दिशा में यह विधेयक लाना सरकार बड़ा कदम, अदालतों का बोझ होगा कम

नई दिल्ली।
सरकारी दफ्तरों के चक्कर, अदालतों की अंतहीन तारीखें और मामूली तकनीकी चूकों के कारण अपराधी कहलाने का डर—दिल्ली के आम नागरिकों और कारोबारियों के लिए यह किसी मानसिक कारावास से कम नहीं था। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। जब छोटी सी प्रक्रियात्मक गलती किसी व्यक्ति को जेल की सलाखों के पीछे ले जाने का डर दिखाती थी तो प्रगति के पहिए थम जाते थे। इस डर की बेड़ियों को काटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कैबिनेट ने एक ऐसे कानून को हरी झंडी दी है जो न केवल कारोबार की राह आसान करेगा बल्कि आम आदमी को प्रशासनिक उत्पीड़न से मुक्ति भी दिलाएगा। यह सिर्फ एक विधेयक नहीं बल्कि व्यवस्था पर जनता के भरोसे का नया दस्तावेज है। रेखा गुप्ता दिल्ली कैबिनेट ने मंगलवार को 'दिल्ली जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026' को अपनी मंजूरी दे दी। इस विधेयक के लागू होने से छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों में आपराधिक मुकदमे समाप्त किए जाएंगे। उनकी जगह नागरिक दंड, प्रशासनिक जुर्माना और अपील की व्यवस्था होगी। गंभीर अपराध, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन से जुड़े मामलों में कठोर प्रावधान पहले की तरह रहेंगे। इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ घटेगा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी। 
इस विधेयक के द्वारा दिल्ली सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा देने का दावा कर रही है। सीएम का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में लागू किए गए जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम के तहत केंद्रीय कानूनों में छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। इसी के अनुरूप, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी अपने कानूनों की समीक्षा करने की सलाह दी गई थी। दिल्ली सरकार ने इसी दिशा में राज्य-स्तरीय विधायी सुधार के तहत अपने विभिन्न कानूनों की गहन समीक्षा की और पाया कि कई मामलों में आपराधिक दंड की जगह नागरिक (सिविल) दंड अधिक उपयुक्त और व्यावहारिक हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह विधेयक कानूनहीनता को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि दंड की अनुपातिकता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। इस विधेयक के लागू होने से छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों में आपराधिक मुकदमे समाप्त किए जाएंगे, उनकी जगह नागरिक दंड, प्रशासनिक जुमार्ना और अपील की व्यवस्था होगी, गंभीर अपराध, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन से जुड़े मामलों में कठोर प्रावधान जैसे हैं वैसे ही रहेंगे। इससे अदालतों पर मुकदमों का बोझ घटेगा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि अधिनियम लागू होने के बाद प्रत्येक तीन वर्ष में जुमार्ने की राशि में 10 प्रतिशत की स्वत: वृद्धि होगी, ताकि मुद्रास्फीति और लागत वृद्धि के अनुरूप दंड प्रभावी बना रहे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस विधेयक से सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा, किसी नए पद के सृजन की आवश्यकता नहीं है। मौजूदा विभागीय संसाधनों से ही क्रियान्वयन किया जाएगा और वित्त विभाग ने प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विधेयक को दिल्ली विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में पारित किया जाएगा।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने