अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह बोले-भवन स्वामियों को शमन शुल्क जमाकर कराकर निर्माण को वैध कराने के दिए जा रहे हैं निर्देश
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने नया बिल्डिंग बायलाज लागू होने के बाद मकान में दुकान यानि आवासीय भूखंड पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के विरूद्ध कड़ा रूख अपनाना शुरू कर दिया है। नए बिल्डिंग बाइलाज के मुताबिक 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा सकती है, मगर उसके लिए भी नियम बनाए गए हैं। जीडीए के प्रवर्तन जोन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में हर छोटे-बड़े रोड पर आवासीय भूखंड़ों पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। ऐसे में अब प्राधिकरण की ओर से भूस्वामियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। इनके जरिए संबंधित भवन स्वामियों को शमन शुल्क जमा कराकर अपने निर्माण को वैध कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
प्राधिकरण की ओर से सभी जोन में योजनावार सूची तैयार की जा रही है और उसी आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह कहते हैं कि नए बिल्डिंग बायलाज लागू होने के बाद नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई है। 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क पर आवासीय में व्यावसायिक गतिविधियां होने पर नोटिस भेजे जा रहे हैं, ताकि लोग शमन शुल्क जमा कराकर अपने निर्माण को वैध करा सकें। अब तक 1200 से अधिक लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं। यदि निर्धारित समय में शमन शुल्क जमा कर दिया जाता है तो निर्माण को वैध माना जाएगा, जिससे प्राधिकरण को भी आर्थिक लाभ होगा। हालांकि नोटिस मिलने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब उन्होंने बिल्डर से संपत्ति खरीदी थी, तब इस तरह की किसी भी जानकारी से उन्हें अवगत नहीं कराया गया था। अब अचानक लाखों रुपये शमन शुल्क के रूप में जमा कराने के नोटिस मिलने से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कई लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम की व्यवस्था करना उनके लिए आसान नहीं है। वहीं, प्राधिकरण की ओर से संजय नगर, इंदिरापुरम, वैशाली, कौशंबी, साहिबाबाद, लोनी, मोदीनगर, गोविंदपुरम, गांधीनगर और विजयनगर समेत लगभग सभी प्रमुख योजनाओं में इस तरह के निर्माण मिले हैं, जिन पर नोटिस भेजने की प्रक्रिया जारी है। मकान में चल रही दुकानों को नोटिस भेजने का सिलसिला जारी है। कई मामलों में नोटिस की अनदेखी करने वालों के विरूद्ध जीडीए ने वाद भी योजित किए हैं। देखना होगा कि रेजीडेंशियल प्लॉट पर कॉमर्शियल एक्टिविटी को जीडीए किस हद तक वैधता के दायरे में ला पाता है क्योंकि जिले में 24 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर भी बड़ी संख्या में मकान में दुकानें संचालित हो रही हैं।