इंस्पेक्टर और एसीपी स्तरीय अफसरों को जांच और केस निपटान के तौर तरीके बताए
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने इंस्पेक्टर और एसीपी के लिए दूसरा ट्रेनिंग सेशन आयोजित किया जिसमें 250 से ज्यादा अधिकारियों को डिजिटल पोर्टल, जांच और केस-निपटान की समय-सीमा के बारे में जानकारी दी गई।दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 6 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय के आदर्श आडिटोरियम में इंस्पेक्टर और असिस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस के लिए अपना दूसरा एडवांस्ड ट्रेनिंग सेशन आयोजित किया। दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक चले इस सेशन में 250 से ज्यादा अधिकारियों ने हिस्सा लिया। ट्रेनिंग का मकसद जांच की क्वालिटी और स्पीड को बेहतर बनाना, पेंडिंग मामलों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करना और जांच प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए राष्ट्रीय और पुलिस-स्तर के डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूरा इस्तेमाल करना था। क्राइम ब्रांच के डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि इस सेशन में अधिकारियों को 'क्राइम कुंडली' मॉडल के इस्तेमाल के बारे में बताया गया कि यह एक एकीकृत, बायोमेट्रिक-सक्षम प्रोफाइलिंग और केस-लिंकेज सिस्टम है जो बार-बार अपराध करने वालों का पता लगाने, संबंधित मामलों को जोड़ने और व्यापक आपराधिक इतिहास बनाने में मदद करता है। जांचों को प्राथमिकता देने और स्पष्ट कार्य योजनाओं को सुनिश्चित करने पर मार्गदर्शन दिया गया ताकि संज्ञेय मामलों का निपटारा 60 या 90 दिनों के भीतर किया जा सके, जैसा भी लागू हो — जिससे पेंडेंसी कम करने और न्यायिक परिणामों में सुधार करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय नारकोटिक्स अपराधी डेटाबेस नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा विकसित अपनी तरह के पहले डेटाबेस 'निदान' के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई, जो इंटर-आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (एनसीबी) और ई-प्रिजन एप्लिकेशन के तहत पूरे भारत में गिरफ्तार नारकोटिक्स अपराधियों का डेटा एकत्र और बनाए रखता है। ट्रेनिंग में इस बात पर जोर दिया गया कि 'निदान' का प्रभावी ढंग से उपयोग करने से दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियों को पिछले नारकोटिक्स-अपराध रिकॉर्ड की जल्दी से जांच करने, आदतन अपराधियों का पता लगाने और अभियोजन में समन्वय करने में कैसे मदद मिल सकती है — जिससे रोकथाम मजबूत होगी और दोषसिद्धि की संभावना में सुधार होगा। अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म और उपकरण जैसे मानस पोर्टल और राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन का उपयोग करना बताया गया। सीईआईआर (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) का इष्टतम उपयोग, फिंगरप्रिंट आधारित पहचान सिस्टम का प्रभावी ढंग से लाभ उठाना। चेन आफ कस्टडी को मजबूत करने और कोर्ट में मुकदमों को सपोर्ट करने के लिए ई-साक्ष्य के जरिए घटनास्थल के वीडियो, बयान, तलाशी/जब्ती फुटेज — को एफआईआर से जोड़ना बताया गया। जांच के सुरागों को गिरफ्तारी और सजा में बदलने के लिए क्रॉस-पोर्टल इंटरआपरेबिलिटी, समय पर डेटा अपलोड, क्वालिटी कंट्रोल और इंटर-एजेंसी कोआर्डिनेशन पर जोर दिया गया। डीसीपी आदित्य गौतम ने कहा कि यह सेशन दिल्ली पुलिस की आधुनिक डिजिटल टूल्स, मजबूत जांच प्रोटोकॉल और कोआर्डिनेटेड एनफोर्समेंट मैकेनिज्म का इस्तेमाल करके अपराधों — जिसमें ड्रग्स से जुड़े अपराध भी शामिल हैं — को ज्यादा प्रभावी ढंग से निपटाने और नतीजे देने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
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