दिल्ली में एनआरआई महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 30 लाख ठगे, दूसरे को निवेश के नाम पर साइबर ठगी का शिकार बनाया
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट स्कैम और फर्जी आॅनलाइन निवेश धोखाधड़ी से जुड़े दो अहम आरोपियों को दबोचा गया है। जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिये घुमाकर करोड़ों रुपये की मनी ट्रेल बनाई गई थी।
पहला मामला एक भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक से जुड़ा है, जो दिल्ली आने के बाद साइबर ठगों के निशाने पर आ गई। 6 दिसंबर को महिला को एक इंटरनेशनल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सैन फ्रांसिस्को एम्बेसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि अमेरिका में दोबारा एंट्री के लिए उसे नो-आॅब्जेक्शन सर्टिफिकेट की जरूरत है। जांच में पता चला कि इसके बाद महिला को दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर से जुड़े होने का दावा करने वाले लोगों से जोड़ा गया। पुलिस यूनिफॉर्म पहने ठगों ने उसे बार-बार वीडियो कॉल कर डराया। उसे 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया। दबाव में आकर महिला ने बैंक अकाउंट में 30 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। ये मामला सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। इस कार्रवाई में वरुण नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया, उस पार्टनरशिप फर्म का पार्टनर था। वो फर्स्ट-लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट का आॅथराइज्ड सिग्नेटरी था। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से 38 एटीएम कार्ड, 51 चेक बुक, कई मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 2।45 लाख रुपए कैश और एक एसयूवी जब्त किए हैं।
पहला मामला एक भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक से जुड़ा है, जो दिल्ली आने के बाद साइबर ठगों के निशाने पर आ गई। 6 दिसंबर को महिला को एक इंटरनेशनल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सैन फ्रांसिस्को एम्बेसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि अमेरिका में दोबारा एंट्री के लिए उसे नो-आॅब्जेक्शन सर्टिफिकेट की जरूरत है। जांच में पता चला कि इसके बाद महिला को दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर से जुड़े होने का दावा करने वाले लोगों से जोड़ा गया। पुलिस यूनिफॉर्म पहने ठगों ने उसे बार-बार वीडियो कॉल कर डराया। उसे 'डिजिटल अरेस्ट' कर लिया। दबाव में आकर महिला ने बैंक अकाउंट में 30 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। ये मामला सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। इस कार्रवाई में वरुण नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया, उस पार्टनरशिप फर्म का पार्टनर था। वो फर्स्ट-लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट का आॅथराइज्ड सिग्नेटरी था। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से 38 एटीएम कार्ड, 51 चेक बुक, कई मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 2।45 लाख रुपए कैश और एक एसयूवी जब्त किए हैं।
दूसरे मामले में दिल्ली के बैंक एन्क्लेव निवासी एक व्यक्ति से 31 लाख 45 हजार रुपये की ठगी हुई। पीड़ित को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां उसे नकली ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने को कहा गया। फिर ज्यादा मुनाफे का लालच देकर उससे छह अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए गए। जैसे ही पैसे ट्रांसफर हुए, व्हाट्सएप ग्रुप गायब हो गया और ऐप भी बंद हो गया। पीड़ित की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। जांच के दौरान पता चला कि साइबर ठगी की रकम को म्यूल अकाउंट्स के जरिए कई लेयर में घुमाया गया। इसके बाद पुलिस ने गुजरात में छापेमारी कर 27 दिसंबर 2025 को आरोपी को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपी अर्जुन सिंह गुजरात के सुरेंद्रनगर का रहने वाला है। अर्जुन सिंह के खाते में ठगी की रकम की दूसरी लेयर ट्रांसफर की गई थी। उसने पैसे निकालकर आगे पहुंचाए और बदले में 2 लाख रुपये कमीशन लिया। उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और चेक बुक बरामद की गई है। इस मामले में दो अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
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