कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई ) और अध्यात्म विषय पर गोष्ठी संपन्न

कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव समाज के लिए उपयोगी है: अतुल सहगल

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) यानि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अध्यात्म विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 756 वाँ वेबीनार था। गोष्ठी में वैदिक प्रवक्ता अतुल सहगल ने वैश्विक समाज के परिपेक्ष में इस विषय की महत्ता को सामने रखा। 
उन्होंने कहा कि आजकल Artificial Intelligence (AI) बहुत गरमाया हुआ और चर्चित विषय है।नई टेक्नोलॉजी के रूप में यह बड़ा महत्वपूर्ण बन चुका है।भारत समेत विश्व के विकसित और अग्रणी देश AI में बड़ा निवेश कर रहे हैं।इसी को भविष्य की प्रोद्योगिकी कहा जा रहा है।इसके उपयोग और प्रयोग आश्चर्य चकित कर देने वाले हैं। यदि मनुष्यों के दैनिक सामान्य कार्य -पढ़ने, लिखने, विचारने,विश्लेषण करने और प्रस्तुत करने के कार्य AI से संचालित यँत्र करने लगेंगे तो फिर मनुष्य क्या करेंगे? अध्यात्म का विषय तो मनुष्य के साथ नित्य ही जुड़ा हुआ है। AI का अध्यात्म से क्या सम्बन्ध है? हम किस प्रकार AI के प्रयोग से अपना अध्यात्मिक स्तर ऊँचा कर सकते हैं? इस प्रकार के अनेक प्रश्न उपस्थित हो जाते हैं। इन सबका समाधान आवश्यक है। वक्ता ने इन्हीं बातों को उठाया।उसके बाद वक्ता ने उन क्षेत्रों का उल्लेख किया जहां AI और टेक्नोलॉजी का मिलाप होता है। 
वक्ता ने बड़े विस्तार से  AI के मानव व समाज के आध्यात्मिक विकास के लिए उपयोग की चर्चा की। इससे व्यक्तिगत मार्गदर्शन, धर्मग्रंथों का सटीक विश्लेषण, नैतिकता व दर्शन के तथ्यों का स्पष्टीकरण किया जा सकता है। व्यक्तिविशेष हेतु सही और श्रेष्ठ आध्यात्मिक दिनचर्या बनायी जा सकती है।धार्मिक पुस्तकों का अनुवाद अनेक भाषाओं में किया जा सकता है। इसकी सहायता यज्ञकर्मों के संचालन व प्रबंधन में भी ली जा सकती है।परंतु AI की सीमाएँ  (limitations) हैं, जिनको समझना होगा।यह केवल एक जड़वत यँत्र है जो चेतना से शून्य है।अतः यह आध्यात्मिक शिक्षक या गुरु का विकल्प कदापि नहीं हो सकता।इसे धर्मग्रन्थ या धर्मपुस्तक का विकल्प ही समझ लें परन्तु यह आर्ष ग्रंथों के विद्वानों का स्थान नहीं ले सकता। वक्ता ने AI के प्रयोग में जोखिम व नैतिक चिंताओं की बात कही।उल्लेखनीय AI उपकरणों का हवाला देते हुए,  AI के उपयोग हेतु अनेक सुझाव प्रस्तुत करते हुए अपना वक्तव्य समाप्त किया 
मुख्य अतिथि डॉ.गजराज सिंह आर्य व अध्यक्ष ओम सपरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम का कुशल संचालन परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने किया। प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गायिका कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, उषा सूद, सुधीर बंसल, कमला हंस आदि ने मधुर भजन सुनाए।

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-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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