कहा-विदाउट हेलमेट डोंट ड्राइव स्कूटी वाली पॉलिसी किसी और के लिए नहीं, वह आपके लिए है.
लखनऊ: हमने यह सोचा कि सड़क सुरक्षा के अभियान में बच्चों को जोड़ना जरूरी है, क्योंकि एक परिवार में मां-बाप किसी से बंधा होता है तो वह बच्चा है. मां-बाप किसी की बात मना नहीं कर सकता तो उसका बच्चा है. जब आपके पापा घर से निकलते हैं अगर हर बच्चा यह इंश्योर कर ले कि पापा बिना हेलमेट के नहीं जाएंगे तो मैं यह नहीं मान सकती कि किसी भी बच्चे के पिता बिना हेलमेट के रोड पर जाएंगे. यहां पर अगर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर बोले हेलमेट पहनिए तो पिता उसे नजरअंदाज कर सकता है, लेकिन उसका घर का बच्चा अगर बोले कि पापा प्लीज हेलमेट पहने बिना मत जाइएगा तो वह नजरअंदाज नहीं कर पाएगा. रोड सेफ्टी का मुद्दा सरकार ने टेकअप किया, परिवहन विभाग इसे डील कर रहा है, लेकिन यह होता घर-घर का मुद्दा है.रोड सेफ्टी सामाजिक मुद्दा है: यह एक सामाजिक मुद्दा है और इसके लिए क्रांति की जरूरत है. चंद अधिकारी और चंद पुलिसकर्मी इस समस्या का निराकरण नहीं कर सकते. दुर्घटनाओं को कम नहीं कर सकते. जब तक हर घर यह नहीं समझेगा कि जान तो जाती घर के लोगों की है. हम सब इसकी इसमें दुखी हो सकते हैं लेकिन नुकसान घर का होता है. यह बातें उत्तर प्रदेश की परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने ट्रांसपोर्टनगर स्थित फिटनेस सेंटर में सड़क सुरक्षा में स्काउट गाइड की भूमिका विषय पर हुए सेमिनार के दौरान कहीं.
सड़क सुरक्षा में स्काउट गाइड की भूमिका: इस मौके पर बड़ी संख्या में स्काउट गाइड कैडेट्स उपस्थित थे. परिवहन आयुक्त ने सभी को सड़क सुरक्षा की शपथ भी दिलाई. इस मौके पर ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किंजल सिंह ने कहा कि विदाउट हेलमेट डोंट ड्राइव स्कूटी वाली पॉलिसी किसी और के लिए नहीं, वह आपके लिए है. मैं सभी बच्चों से रिक्वेस्ट करना चाहती हूं कि आप इतना चेंज ले आइए कि आपका कोई बड़ा भाई कोई बहन और मम्मी पापा बिना हेलमेट के नहीं जाएं. ये आप बड़ा कंट्रीब्यूशन करेंगे.
फैशन के चक्कर में युवा खो रहे जान: 18 से 35 साल के लोग एक्सीडेंट में घायल होते हैं उनकी डेथ होती है, ऐसा क्यों होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे उत्साहित होते हैं. उन्हें फैशन की चिंता होती है. उन्हें मेकअप की चिंता होती है. बालों में हाथ घुमाना होता है. उन्हें चिंता नहीं होती कि मैं मर जाऊंगा. जो हमारी नौजवान पीढ़ी है, जो हमारा भविष्य है हम नहीं चाहते कि आप उस फीलिंग से जुड़िए कि मैं मर जाऊंगा, लेकिन इस फीलिंग को समझिए कि यह रिस्पांसबिलिटी है आपकी, कि आप नहीं मरें. आप भविष्य हैं हिंदुस्तान का. हेलमेट की वजह से आप अपना जीवन नहीं खो सकते.
दो पहिया वाहन चालकों को ज्यादा खतरा: आपके माता-पिता ने इसलिए नहीं पढ़ाया अपनी कुर्बानियां इसलिए नहीं दीं कि आप बिना हेलमेट पहने एक्सीडेंट में मर जाओ. यह मत समझिए कि गलती आपकी होती है. दो पहिया वाहन चालक की गलती कभी नहीं होती. उसकी गलती सिर्फ इतनी होती है कि हेलमेट नहीं पहना, लेकिन सामने से जो गाड़ी आती है उससे यह तय है कि नुकसान दो पहिया वाहन चालक का ही होता है. मैं बस यही चाहूंगी कि आपको जो यहां सिखाया गया है यह संदेश हमारा है, कहानी हम सबकी है.
फैशन के चक्कर में युवा खो रहे जान: 18 से 35 साल के लोग एक्सीडेंट में घायल होते हैं उनकी डेथ होती है, ऐसा क्यों होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे उत्साहित होते हैं. उन्हें फैशन की चिंता होती है. उन्हें मेकअप की चिंता होती है. बालों में हाथ घुमाना होता है. उन्हें चिंता नहीं होती कि मैं मर जाऊंगा. जो हमारी नौजवान पीढ़ी है, जो हमारा भविष्य है हम नहीं चाहते कि आप उस फीलिंग से जुड़िए कि मैं मर जाऊंगा, लेकिन इस फीलिंग को समझिए कि यह रिस्पांसबिलिटी है आपकी, कि आप नहीं मरें. आप भविष्य हैं हिंदुस्तान का. हेलमेट की वजह से आप अपना जीवन नहीं खो सकते.
दो पहिया वाहन चालकों को ज्यादा खतरा: आपके माता-पिता ने इसलिए नहीं पढ़ाया अपनी कुर्बानियां इसलिए नहीं दीं कि आप बिना हेलमेट पहने एक्सीडेंट में मर जाओ. यह मत समझिए कि गलती आपकी होती है. दो पहिया वाहन चालक की गलती कभी नहीं होती. उसकी गलती सिर्फ इतनी होती है कि हेलमेट नहीं पहना, लेकिन सामने से जो गाड़ी आती है उससे यह तय है कि नुकसान दो पहिया वाहन चालक का ही होता है. मैं बस यही चाहूंगी कि आपको जो यहां सिखाया गया है यह संदेश हमारा है, कहानी हम सबकी है.
बिना हेलमेट पहने दो पहिया वाहन न चलाएं: कह रहे हैं आप पर घटना हम सबकी है. मुझे इंश्योर करिए कि आपके घर में कोई भी बिना हेलमेट पहने नहीं जाएगा. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किंजल सिंह ने कहा कि जितने भी यहां पर शिक्षक आए हैं उनसे भी मैं कहना चाहूंगी जैसे आप कॉलेज में गुड बिहेवियर सीखते हैं यह सबसे इंपॉर्टेंट मुद्दा है. इस मुद्दे में जब सोच बदलेगी तभी यहां तरीके बदलेंगे. फॉरेन में एक्सीडेंट इतने नहीं होते वहां पर सोशल बिहेवियर में रिस्पांसिबल बिहेवियर भी होता है, लेकिन हम इस पर ध्यान नहीं देते हैं. लाइफ बहुत गंभीर है. मां-बाप बहुत कुर्बानियां देते हैं. मां-बाप बहुत मेहनत करते हैं.
सड़क हादसे में जनहानि कम करने की कोशिश: माता-पिता अपनी लाइफ में बहुत कटौती करके आपको बाइक दिलवाते हैं. एक एवरेज हाउसहोल्ड में एक लड़के की बाइक लाने के लिए उसका फादर साल भर बचत करता है तब जाकर बाइक लाकर देता है. जब वही बाइक उसकी मौत का कारण बन जाती है तो पिता अपने को कभी माफ नहीं कर पाता. मैं सिर्फ इतना कहूंगी सवारी आपकी है लेकिन सवारी का ऐसा प्रयोग मत करिए कि आपका जीवन चला जाए और परिवार बहुत दुखी रहे.
31 जनवरी तक चलेगा रोड सेफ्टी माह: परिवहन आयुक्त ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और जनहानि को कम से कम करने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा माह के दौरान परिवहन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. एक जनवरी से 31 जनवरी तक चलने वाले इस रोड सेफ्टी मंथ में जिला और संभाग स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है. परिवहन विभाग की इन कार्यशालाओं में यातायात नियमों के संबंध में प्रशिक्षण और जानकारी दी जा रही है.
कैशलेस उपचार की जानकारी दी गयी: कार्यशालाओं में 'कैशलेस उपचार सुविधा' और 'राहवीर योजना' के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है. परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा माह के दौरान जनपद और संभाग स्तर की कार्यशालाओं में ट्रैफिक नियमों के बारे में लोगों को जागरूकता प्रदान की जा रही है. प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों में चलाई जा रही प्रशिक्षण कार्यशालाओं में आपदा मित्र, सिविल डिफेंस, एनसीसी कैडेट्स, स्वयंसेवी संस्था सीआइए, डीलर्स एसोसिएशन और स्काउट्स एंड गाइड्स के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी शामिल हो रहे हैं.
सड़क हादसे में जनहानि कम करने की कोशिश: माता-पिता अपनी लाइफ में बहुत कटौती करके आपको बाइक दिलवाते हैं. एक एवरेज हाउसहोल्ड में एक लड़के की बाइक लाने के लिए उसका फादर साल भर बचत करता है तब जाकर बाइक लाकर देता है. जब वही बाइक उसकी मौत का कारण बन जाती है तो पिता अपने को कभी माफ नहीं कर पाता. मैं सिर्फ इतना कहूंगी सवारी आपकी है लेकिन सवारी का ऐसा प्रयोग मत करिए कि आपका जीवन चला जाए और परिवार बहुत दुखी रहे.
31 जनवरी तक चलेगा रोड सेफ्टी माह: परिवहन आयुक्त ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और जनहानि को कम से कम करने के उद्देश्य से सड़क सुरक्षा माह के दौरान परिवहन विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. एक जनवरी से 31 जनवरी तक चलने वाले इस रोड सेफ्टी मंथ में जिला और संभाग स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है. परिवहन विभाग की इन कार्यशालाओं में यातायात नियमों के संबंध में प्रशिक्षण और जानकारी दी जा रही है.
कैशलेस उपचार की जानकारी दी गयी: कार्यशालाओं में 'कैशलेस उपचार सुविधा' और 'राहवीर योजना' के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है. परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने बताया कि सड़क सुरक्षा माह के दौरान जनपद और संभाग स्तर की कार्यशालाओं में ट्रैफिक नियमों के बारे में लोगों को जागरूकता प्रदान की जा रही है. प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों में चलाई जा रही प्रशिक्षण कार्यशालाओं में आपदा मित्र, सिविल डिफेंस, एनसीसी कैडेट्स, स्वयंसेवी संस्था सीआइए, डीलर्स एसोसिएशन और स्काउट्स एंड गाइड्स के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी शामिल हो रहे हैं.
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