कांग्रेस नेता नरेन्द्र राठी की माताजी के निधन पर शोक जताने शालीमार गार्डन पहुंचे थे एमपी के पूर्व सीएम
साहिबाबाद। कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक मुलाकात में यह स्वीकार किया कि यूजीसी के मामले में जो गाइडलाइन बनाई गई हैं उसमें झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए मैंने विस्तृत रूप में इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट किया हुआ है, हालांकि यूजीसी ने इसे नहीं माना। यूजीसी द्वारा बनाए गए नियमों को सभी दलों द्वारा सर्वसम्मति से दिए गए प्रस्ताव के तहत ही बनाया गया है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह शालीमार गार्डन निवासी कांग्रेसी नेता नरेंद्र राठी की माता श्रीमती प्रकाशी देवीके निधन पर शोक व्यक्त करने आए थे। इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि वह यूजीसी के संबंध में जो स्टैंडिंग कमेटी बनी थी उसके वे अध्यक्ष थे लेकिन यह भी सही है कि उसमें सभी दलों के नेता शामिल थे। वह चाहते थे कि जो झूठी शिकायत करता है उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई हो लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति जनजाति के बच्चों के साथ भेदभाव हुआ था उस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गाइडलाइन बनाई गई थीं, जिसका अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से सबके लिए लड़ी है गरीब परिवारों का समर्थन किया है, और इस मामले में वह छात्रों के साथ है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अगर अन्याय होता है तो उसे कानूनी संरक्षण की मिले और अन्य करने वालों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब सुप्रीम कोर्ट को फैसला देना है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का होना बहुत जरूरी है और यह लोकतंत्र के जीवित रहने के लिए जरूरी है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की दुर्दशा के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इस विषय में वे कुछ नहीं कह सकते आप कांग्रेस कमेटी के जो महासचिव है उनसे बात करें। एक अन्य सवाल के जवाब में जब उनसे पूछा गया कि यूजीसी की गाइडलाइन में पहले ओबीसी वर्ग नहीं था अब उसको जोड़ा गया है तो उन्होंने कहा कि भेदभाव तो ओबीसी के साथ भी होता है और इसमें कानूनी संरक्षण उन्हें भी दिया जाना चाहिए।
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