लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बचाने के लिए बलिदान देने का वक्त आ गया है: ललित चौधरी
गाजियाबाद। गाजियाबाद पुलिस प्रशासन के खिलाफ चल रहा पत्रकारों का धरना अब नए चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। धरने के 10वें दिन आयोजित प्रेस वार्ता में आंदोलनकारी पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी मांगों को लेकर संघर्ष तेज करने का ऐलान किया।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ललित चौधरी ने कहा कि न्याय की मांग को लेकर चल रहा उनका आंदोलन पिछले एक माह से जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि "लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को इतना कमजोर कर दिया गया है कि उसे बचाने के लिए अब बलिदान देने का समय आ गया है।"
ललित चौधरी ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद पुलिस प्रशासन अपने कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने का प्रयास कर रहा है तथा शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने बताया कि उनकी सहयोगी पत्रकार अपूर्वा ने न्याय की मांग को लेकर 10 दिनों तक अनशन किया था, जिसे अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त किया गया। उनका आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
प्रेस वार्ता के दौरान ललित चौधरी ने कहा कि आंदोलन में शामिल अधिकांश पत्रकार साधारण परिवारों से आते हैं और लंबे समय से धरने पर बैठे रहने के कारण उनके परिवारों और आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने अपनी सहयोगी अपूर्वा के स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद वह आंदोलन में लगातार सक्रिय हैं।
ललित चौधरी ने दावा किया कि उन्होंने अपनी बेगुनाही के समर्थन में कई दस्तावेज और साक्ष्य संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए हैं। उनका कहना है कि यदि वे दोषी हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और यदि वे निर्दोष हैं तो उनके साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों और आम जनता के बीच अविश्वास का माहौल पैदा किया जा रहा है, जिससे पत्रकारों की भूमिका प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन: आंदोलनकारी पत्रकारों ने घोषणा की कि वे शुक्रवार को जिलाधिकारी गाजियाबाद के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने के साथ-साथ गाजियाबाद पुलिस प्रशासन के खिलाफ शिकायतें भी दर्ज कराई जाएंगी। प्रेस वार्ता के अंत में आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
Tags
गाजियाबाद

