तंबाकू की लत युवाओं के भविष्य के लिए गंभीर खतरा, जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी उपाय: प्राचार्य डॉ. राहुल पॉल
एमएमजी अस्पताल एवं राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ गाजियाबाद के सहयोग से प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित
गाजियाबाद। तंबाकू का सेवन विश्वभर में जनस्वास्थ्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। विशेष रूप से किशोरों और युवाओं में बढ़ती तंबाकू एवं निकोटीन उत्पादों की लत चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि साथियों के दबाव, तनाव, जिज्ञासा, सामाजिक प्रभावों तथा तंबाकू उद्योग की भ्रामक प्रचार रणनीतियों के कारण बड़ी संख्या में युवा तंबाकू सेवन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2026 की थीम ''आकर्षण के पीछे की सच्चाई: निकोटीन एवं तंबाकू की लत का मुकाबला" तंबाकू उत्पादों की चमकदार छवि के पीछे छिपे गंभीर स्वास्थ्य खतरों को उजागर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट, गुटखा, वेपिंग उपकरण और अन्य निकोटीन युक्त उत्पाद देखने में भले आकर्षक लगें, लेकिन ये व्यक्ति को लत का शिकार बनाकर कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर धकेलते हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में बिना धुएं वाले तंबाकू के बढ़ते सेवन के कारण मुख कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। दंत चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को प्रतिदिन ऐसे मरीजों का सामना करना पड़ता है जो मसूड़ों की बीमारी, दांतों की क्षति, मुख के पूर्व-कैंसरकारी घाव, ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस तथा विभिन्न प्रकार के कैंसर से पीड़ित होते हैं। इनमें से अधिकांश बीमारियों को समय रहते जागरूकता और तंबाकू से दूरी बनाकर रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू-मुक्त पीढ़ी का निर्माण केवल नारों से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, विद्यालय, महाविद्यालय, स्वास्थ्यकर्मी और समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा। युवाओं को सही जानकारी, तनाव से निपटने के स्वस्थ उपाय और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है।
इसी उद्देश्य से जनस्वास्थ्य संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए इन्द्रप्रस्थ डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल ने 20 मई से 6 जून 2026 तक तंबाकू निषेध एवं जन-जागरूकता संबंधी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राहुल पॉल के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों, रोगियों और आमजन को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा तंबाकू त्याग के लिए प्रेरित करना रहा। अभियान के तहत घरौली सैटेलाइट सेंटर में टीबी रोगियों की जांच एवं एक्स-रे किए गए। महाविद्यालय एवं विभिन्न शिविरों में रोगियों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने तंबाकू निषेध की शपथ ली। मौखिक कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आउटरीच कैंप आयोजित किए गए।
इसके अलावा एमएमजी अस्पताल एवं राज्य तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ, गाजियाबाद के सहयोग से स्वास्थ्यकर्मियों और गर्भवती महिलाओं के लिए प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए। फैक्ट्री परिसरों में नुक्कड़ नाटक, परामर्श सत्र और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों से अवगत कराया गया। महाविद्यालय परिसर में भी तंबाकू एवं मौखिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू छोड़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति, बच्चों को जागरूक करने वाला प्रत्येक अभिभावक और समाज में संदेश पहुंचाने वाला प्रत्येक विद्यार्थी एक स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। तंबाकू के विरुद्ध यह संघर्ष केवल एक बुरी आदत से बचने का प्रयास नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने का संकल्प है-"स्वस्थ कल के लिए आज ही तंबाकू को कहें ना।"
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