नगर निगम की बड़ी योजना: गोबर बनेगा वेस्ट से वेल्थ मॉडल
गाजियाबाद। नगर निगम शहर की डेयरियों से निकलने वाले गोबर के निस्तारण के लिए एक नई और वैज्ञानिक व्यवस्था लागू करने जा रहा है। इस योजना के तहत शहर में छह गोबर डंपिंग यार्ड (कलेक्शन सेंटर) बनाए जाएंगे, जहां डोर-टू-डोर गोबर कलेक्शन के माध्यम से एकत्रित अपशिष्ट को प्रोसेस किया जाएगा।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, शहर की विभिन्न कॉलोनियों और डेयरियों से गोबर एकत्र करने के लिए विशेष क्षेत्रीय टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें प्रतिदिन डेयरियों से गोबर उठाकर निर्धारित डंपिंग यार्ड तक पहुंचाएंगी। इस व्यवस्था से नालियों और सीवर लाइनों में गोबर बहाए जाने की समस्या पर रोक लगेगी, जिससे विशेषकर मानसून के दौरान जलभराव और जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
‘अपशिष्ट से संपदा’ मॉडल पर काम: नगर निगम की यह योजना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ (अपशिष्ट से संपदा) मॉडल पर आधारित है। डंपिंग यार्ड में एकत्र गोबर को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद), बायो-फ्यूल और अन्य जैविक उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
प्राकृतिक पेंट और ईको-प्रोडक्ट्स का निर्माण: इस परियोजना को नंदी पार्क गौशाला में पहले से संचालित प्लांट से भी जोड़ा जाएगा, जहां गोबर से प्राकृतिक पेंट तैयार किया जा रहा है। यह पेंट एंटी-बैक्टीरियल गुणों से युक्त होने के साथ गर्मी कम करने में भी सहायक माना जाता है। नगर निगम का लक्ष्य है कि इस मॉडल को शहर के सभी पांच जोनों में विस्तारित किया जाए।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और वित्तीय सहायता: इस नवाचार को ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज मेयर्स चैलेंज के तहत वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है, जिसके तहत नगर निगम को वित्तीय सहायता भी प्राप्त हो रही है। इसी सहयोग से इस परियोजना का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।
महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलेगा रोजगार: इस पूरी व्यवस्था में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को भी जोड़ा जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिलेगा। नगर निगम का मानना है कि यह त्रिस्तरीय व्यवस्था—सफाई, खाद उत्पादन और प्राकृतिक पेंट निर्माण—गाजियाबाद को स्वच्छ और कचरा मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
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