शाहदरा पुलिस ने पकड़ा प्लेसमेंट एजेंसी की आड़ में चल रहा ठगी का खेल
नई दिल्ली। शाहदरा जिले की साइबर थाना पुलिस ने घरेलू सहायिका (मेड) उपलब्ध कराने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक फर्जी प्लेसमेंट एजेंसी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का मास्टरमाइंड भी शामिल है। पुलिस ने 33 हजार रुपये की ठगी के मामले का खुलासा करते हुए आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एक एटीएम कार्ड, रबर स्टांप, प्लेसमेंट एजेंसी के पैम्फलेट, रजिस्ट्रेशन संबंधी दस्तावेज तथा नकद रसीदों के बंडल बरामद किए हैं।
शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि शालिनी मेहता नामक महिला ने साइबर थाना शाहदरा में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से 'कुमार नरसिंह ब्यूरो एंड प्लेसमेंट सर्विस' से घरेलू सहायिका रखने के लिए संपर्क किया था। एजेंसी ने एक युवती को उनके घर भेजा और पुलिस सत्यापन तथा एग्रीमेंट कराने का भरोसा देकर 20 हजार रुपये ऑनलाइन और 13 हजार रुपये नकद वसूल लिए।
कुछ दिनों बाद उक्त युवती अचानक घर से गायब हो गई। पीड़िता द्वारा एजेंसी से संपर्क करने पर पहले दूसरी मेड उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में एजेंसी संचालकों और युवती के मोबाइल फोन बंद हो गए। खुद को ठगी का शिकार महसूस होने पर महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के लिए साइबर थाना शाहदरा की विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने मोबाइल नंबरों, आईएमईआई डिटेल, डिजिटल फुटप्रिंट और बैंक खातों के लेन-देन की गहन जांच की। तकनीकी निगरानी और साक्ष्यों के आधार पर बिहार के मधुबनी निवासी 36 वर्षीय हिताई मुखिया तथा झारखंड के गुमला निवासी 22 वर्षीय जाह्नवी कुमारी को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी 'कुमार नरसिंह ब्यूरो एंड प्लेसमेंट सर्विस' और 'एच.के. मैनपावर कंसल्टेंसी' के नाम से फर्जी प्लेसमेंट एजेंसियां संचालित कर रहे थे। वे घरेलू सहायिका उपलब्ध कराने, एग्रीमेंट कराने और पुलिस सत्यापन के नाम पर लोगों से अग्रिम राशि वसूलते थे। इसके बाद जाह्नवी कुमारी को अलग-अलग घरों में भेजा जाता था और कुछ दिन बाद वह बिना किसी सूचना के वहां से चली जाती थी। इसके बाद उसी युवती को दूसरे ग्राहक के यहां भेजकर दोबारा ठगी की जाती थी।
पुलिस के अनुसार, गिरोह एक ही घरेलू सहायिका का इस्तेमाल कर कई लोगों से पैसे ऐंठने का काम करता था। बरामद दस्तावेजों और रसीदों की जांच की जा रही है, ताकि अन्य पीड़ितों की पहचान की जा सके और गिरोह के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सके।
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