डीडीए की नई नीति लागू: अब फ्लैट्स में ग्रिल, सनशेड और EV चार्जिंग पॉइंट बिना अनुमति लगेंगे, बड़े निर्माण के लिए लेनी होगी अनुमति
नई दिल्ली। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अपने फ्लैटों में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत देते हुए अतिरिक्त निर्माण और संशोधन संबंधी नई नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब फ्लैटों में कई छोटे-मोटे बदलाव और मरम्मत के कार्य बिना किसी पूर्व अनुमति के किए जा सकेंगे। हालांकि, भवन की संरचना को प्रभावित करने वाले बड़े बदलावों के लिए पहले की तरह डीडीए या संबंधित स्थानीय निकाय से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।डीडीए की संशोधित नीति के अनुसार, फ्लैट मालिक अब बालकनी और बरामदे में ग्रिल या ग्लेजिंग लगा सकेंगे। इसके अलावा, आंगन की दीवार पर अधिकतम सात फीट तक जाली या ग्रिल बढ़ाने, कॉमन रास्ते को प्रभावित किए बिना दरवाजे की स्थिति बदलने, सनशेड लगाने, बालकनी की रेलिंग की ऊंचाई बढ़ाने और पानी की पीवीसी टंकी स्थापित करने की भी अनुमति होगी।
इसी तरह फर्श बदलने, वॉटरप्रूफिंग कराने, रैंप बनाने, एयर कंडीशनर या एग्जॉस्ट फैन लगाने के लिए छोटी ओपनिंग बनाने तथा इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग पॉइंट लगाने जैसे कार्य भी अब बिना अनुमति के किए जा सकेंगे। इससे फ्लैट मालिकों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बार-बार विभागीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, डीडीए ने स्पष्ट किया है कि भवन की संरचनात्मक मजबूती को प्रभावित करने वाले किसी भी बड़े बदलाव के लिए पूर्व स्वीकृति अनिवार्य रहेगी। इनमें छत पर हल्के ढलान वाली रूफ (स्लोप रूफ) बनाना, किचन, बाथरूम या टॉयलेट की जगह बदलना, सोलर पैनल स्थापित करना, कॉमन सीढ़ी को टेरेस तक बढ़ाना तथा कोर्टयार्ड को आंशिक रूप से कवर करना शामिल है। ऐसे मामलों में भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विशेष रूप से परीक्षण किया जाएगा।
डीडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे फ्लैट को तोड़कर दोबारा निर्माण करना या किसी प्रकार का बड़ा स्ट्रक्चरल परिवर्तन बिना डीडीए की औपचारिक मंजूरी के नहीं किया जा सकेगा। नई नीति का उद्देश्य फ्लैट मालिकों को छोटी मरम्मत और आवश्यक सुविधाओं के लिए राहत देना है, जबकि इमारतों की सुरक्षा और नियोजित विकास सुनिश्चित करना भी है।
Tags
दिल्ली