नोएडा में धोखाधड़ी और फर्जी एओडब्ल्यूए पंजीकरण का मामला पुलिस की दहलीज तक पहुंचा

नोएडा सेक्टर-113 थाने में 9 नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, पुलिस ने शुरू की जांच

नोएडा।
नोएडा के सेक्टर-113 थाना क्षेत्र में जालसाजी, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोपों को लेकर पुलिस ने नौ नामजद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों, जाली हस्ताक्षरों और भ्रामक शपथपत्रों (हलफनामों) के आधार पर कथित रूप से एंथुरियम ऑफिस अलॉटीज वेलफेयर एसोसिएशन (AOWA) का अवैध गठन और पंजीकरण कराया गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों की वैधता, हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। साथ ही सभी आरोपियों की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है।
इन लोगों को बनाया गया नामजद आरोपी: एफआईआर में कल्पना सचान, शशांक कुमार, नीरजा सिंघल, पारुल जैन, दिव्या गौतम, साहिल राणा, नीरज कुमार सिंघल, रविंद्र कुमार बनवारिया और मोहम्मद महमूदुद्दीन हुसैन को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस इन सभी की भूमिका की जांच कर रही है। इसके अलावा शिकायत में अनूप सचान, प्रशांत टंडन, सुनील छजेरा, अनुराग योहे, चंदर रुखेजा और पियूष अग्रवाल के नाम भी सामने आए हैं, जिनके संबंध में भी कार्रवाई की मांग की गई है। 
फर्जी दस्तावेजों से एसोसिएशन पंजीकृत कराने का आरोप: शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर, जाली हस्ताक्षरों और भ्रामक हलफनामों के माध्यम से एक फर्जी एंथुरियम ऑफिस अलॉटीज वेलफेयर एसोसिएशन का गठन और उसका पंजीकरण कराया। शिकायत में कहा गया है कि इस कथित एसोसिएशन का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के अनुचित और अवैध लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया। 
बिना अनुमति संपत्ति को बताया कार्यालय: एफआईआर के मुताबिक, जिस संपत्ति को एसोसिएशन का पंजीकृत कार्यालय दर्शाया गया है, वह शिकायतकर्ता के स्वामित्व और कब्जे में है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त संपत्ति के उपयोग के लिए न तो कोई अनुमति दी गई थी और न ही कोई लीज अथवा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया गया था। इसके बावजूद कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उस पते का उपयोग कार्यालय के रूप में दर्शाया गया। 
दबाव बनाने और भ्रामक सामग्री प्रसारित करने का भी आरोप: शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित फर्जी एसोसिएशन का उपयोग शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मॉर्फ्ड एवं भ्रामक सामग्री प्रसारित करने, धमकियां देने और अवैध लाभ हासिल करने के लिए किया गया। शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा बताया है। 
फोरेंसिक जांच कराएगी पुलिस: पुलिस सूत्रों के अनुसार, विवादित दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और अन्य रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि उनकी वास्तविकता का पता लगाया जा सके। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और डिजिटल रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया जाएगा।
निष्पक्ष जांच का दावा: पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के दौरान जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी नामजद आरोपियों और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की गहन जांच जारी है।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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