बंद गेट, धुएं से भरी सीढ़ियां और चारों और चीख-पुकार के बीच अग्निशमन कर्मियों का अदम्य साहस बना था मिसाल, स्वतंत्रता दिवस पर मिला सम्मान
गाजियाबाद। खोडा कॉलोनी स्थित सुनेहरी रेजीडेन्सी में बीते मार्च महीने में हुए भीषण अग्निकांड के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना आग और घने धुएं के बीच फंसे लोगों की जान बचाने वाले अग्निशमन विभाग के 10 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गैलेंट्री मेडल से सम्मानित किया गया है। इन अग्निशमन कर्मियों ने बेहद जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन में 27 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला था।सीएफओ राहुल पॉल और वैशाली के अग्निशमन अधिकारी मूलचंद समेत 10 फायरफाइटर्स को अदम्य साहस का परिचय देने पर यह सम्मान मिला है। आलाधिकारियों ने भी इनकी सराहना की है।
बता दें कि 3 मार्च को जी+5 मंजिल तक निर्मित सुनेहरी रेजीडेन्सी सोसायटी, 27 न्यू अजन्ता पार्क, खोडा कॉलोनी के ग्राउंड फ्लोर पर बनी पार्किंग में खड़े करीब 35 दोपहिया वाहनों तथा सीढ़ियों के पास लगे इलेक्ट्रिक मीटरों में अचानक आग लग गई थी। आग देखते ही देखते विकराल रूप लेने लगी और धुआं तेजी से भवन के ऊपरी तलों तक पहुंच गया। हादसे के समय भवन में करीब 160 लोग फंसे हुए थे। भवन दो रास्तों पर स्थित था, लेकिन दोनों ओर के गेट बंद थे और उन पर ताले लगे हुए थे। आग की लपटें तथा घना काला धुआं सीढ़ियों और बालकनियों के रास्ते तेजी से ऊपर की ओर फैल रहा था। भवन में बाहर निकलने के लिए एक ही सीढ़ी होने के कारण स्थिति और भी भयावह हो गई थी।
दोनों गेटों पर लगे थे ताले: आग और धुएं से घिरे भवन के आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। बालकनियों में फंसी महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चीख-पुकार कर रहे थे। भवन के आगे और पीछे की ओर से लोगों के बचाओ-बचाओ की आवाजें लगातार आ रही थीं। नीचे मौजूद लोग भीषण आग और धुएं के कारण असहाय नजर आ रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएफओ राहुल पॉल की अगुवाई में फायर सर्विस यूनिट ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अग्निशमन कर्मियों ने भवन के पीछे की ओर, जहां पार्किंग में आग अत्यधिक तीव्रता से जल रही थी, पानी की पंपिंग शुरू कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। इसके साथ ही बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बने दोनों गेटों पर लगे तालों को हथौड़े और कटर की मदद से तोड़कर रास्ता बनाया गया। गेट खुलने के बाद अग्निशमन कर्मियों ने भवन के अंदर प्रवेश कर फंसे लोगों की तलाश शुरू की।
एक्सटेंशन लैडर से बालकनी में फंसे लोगों को निकाला: भवन के अगले हिस्से में एक्सटेंशन लैडर लगाई गई और बालकनियों में फंसे लोगों को एक-एक करके नीचे उतारना शुरू किया गया। दूसरी ओर, फायर कर्मियों ने धुएं और गर्मी के बीच भवन के अंदर जाकर तलाशी अभियान चलाया। रेस्क्यू के दौरान ऊपरी मंजिलों पर 27 लोग फंसे मिले। इनमें पुरुषों के साथ महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। कई लोग अपने फ्लैटों के अंदर से दरवाजे बंद होने के कारण बाहर नहीं निकल पा रहे थे। अग्निशमन कर्मियों ने जरूरत पड़ने पर फ्लैटों के दरवाजे तोड़े और बालकनी, बाथरूम तथा फ्लैट के अन्य हिस्सों में फंसे लोगों को खोजकर बाहर निकाला।
किसी को कंधे पर उठाया, तो बच्चों को गोद में लेकर उतरे: रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान कई लोग धुएं और आग के कारण मूर्छित अथवा घायल अवस्था में मिले। अग्निशमन कर्मियों ने उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए अपने कंधों पर उठाया। कुछ लोगों को दो अग्निशमन कर्मियों ने हाथों की सीट बनाकर बाहर निकाला, जबकि बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित नीचे लाया गया। आग, धुएं और तपिश के बीच एक-एक व्यक्ति को सुरक्षित निकालने के लिए अग्निशमन कर्मियों ने लगातार जोखिम उठाया। भवन की सीढ़ियां धुएं और गर्मी से भरी हुई थीं, फिर भी कर्मियों ने बिना अपनी जान की परवाह किए ऊपरी मंजिलों तक पहुंचकर फंसे लोगों को बाहर निकाला। इस साहसिक और जोखिमपूर्ण बचाव अभियान में अग्निशमन विभाग की तत्परता से बड़ी जनहानि को टालने में मदद मिली। रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल कर्मियों के अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय सेवा को देखते हुए उन्हें गैलेंट्री मेडल के लिए सम्मानित किया गया।
इन अग्निशमन कर्मियों को मिला गैलेंट्री मेडल: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सुनेहरी रेजीडेन्सी अग्निकांड में साहसिक बचाव कार्य करने वाले जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को गैलेंट्री मेडल प्रदान किया गया है उनमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी गाजियाबाद राहुल पाल, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी वैशाली मूलचंद सिंह, , लीडिंग फायरमैन नेत्रपाल, फायर सर्विस चालक रामपाल सिंह, फायर सर्विस चालक सतेन्द्र कुमार, फायरमैन उमाकांत शुक्ला, फायरमैन दीपक कुमार-1, फायरमैन जोगेंद्र सिंह, फायरमैन विनय यादव और फायरमैन आयुष्मान कुमार शर्मा शामिल हैं। इन अग्निशमन कर्मियों का सम्मान केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस साहस और कर्तव्यनिष्ठा की पहचान है, जिसके बल पर भीषण आग के बीच फंसे 27 लोगों को सुरक्षित जीवन मिल सका। सुनेहरी रेजीडेन्सी की घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा के समय प्रशिक्षित और साहसी अग्निशमन दल की त्वरित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण होती है।
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