बीमा पॉलिसी रिफंड के नाम पर 24 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, दो गिरफ्तार

गाजियाबाद।
थाना साइबर क्राइम की पुलिस टीम ने विभिन्न बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर बीमा पॉलिसी का रिफंड कराने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी से गाजियाबाद में दर्ज मुकदमे सहित तीन राज्यों में करीब 24 लाख रुपये की साइबर ठगी की घटनाओं का खुलासा हुआ है।
पुलिस के मुताबिक, गुलधर, कविनगर निवासी रमेश कुमार शर्मा से बीमा पॉलिसी का रिफंड कराने के नाम पर करीब 11 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी। इस संबंध में थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही थी। मामले में एनसीआरपी पोर्टल की एसओपी के अनुसार फ्रीज कराई गई 1.43 लाख रुपये की धनराशि को पीड़ित को वापस कराने की कार्रवाई भी चल रही है।
दो आरोपी गिरफ्तार: जांच के दौरान साइबर क्राइम पुलिस ने घटना में शामिल सुनील कुमार पुत्र स्वर्गीय कालीचरन, निवासी गांव किरथपुर निमाना, थाना लोधा, अलीगढ़, हाल निवासी साईलोक नगर, धरमपुर छपरौला, थाना बादलपुर, गौतमबुद्धनगर तथा आशीष शर्मा पुत्र स्वर्गीय गोपाल शर्मा, निवासी पी-194, सेक्टर-77, फरीदाबाद, हरियाणा को थाना क्षेत्र कोतवाली, गाजियाबाद से गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन बरामद किए। बरामद साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस ने तेलंगाना के हैदराबाद निवासी बृजेश मौर्य से 2.50 लाख रुपये तथा महाराष्ट्र के डोंबिवली निवासी सतीश विनायक नाके से 9.87 लाख रुपये की साइबर ठगी की घटनाओं का भी खुलासा किया है।
इंश्योरेंस कंपनी में काम के दौरान हासिल किया ग्राहकों का डाटा: पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे पूर्व में नोएडा के सेक्टर-62 स्थित एक इंश्योरेंस पॉलिसी ब्रोकिंग कंपनी में कॉलिंग का काम करते थे। कंपनी में काम करने के दौरान उन्हें ग्राहकों का डाटा उपलब्ध होता था। इसी डाटा का इस्तेमाल कर वे बीमा पॉलिसी से संबंधित सेवाएं देने के नाम पर ग्राहकों से संपर्क करते थे। आरोपी खुद को बीमा कंपनी का कर्मचारी अथवा एजेंट बताकर पॉलिसी रिफंड कराने का झांसा देते थे। इसके बाद रिफंड के लिए अलग-अलग टैक्स और अन्य शुल्क जमा कराने के नाम पर पीड़ितों से रकम अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते थे।
गूगल से डाउनलोड करते थे फर्जी आईकार्ड: पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए बीमा कंपनियों के कर्मचारियों के आईकार्ड गूगल से डाउनलोड कर व्हाट्सऐप के जरिए पीड़ितों को भेजे। इससे पीड़ितों को आरोपियों के बीमा कंपनी से जुड़े होने का भरोसा हो जाता था। पूछताछ में सामने आया कि सुनील कुमार खुद को इंश्योरेंस एजेंट के.के. पांडेय और आशीष शर्मा खुद को इंश्योरेंस एजेंट पवन कुमार पटेल बताकर लोगों को फोन करते थे। पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी के लिए इंश्योरेंस कंपनी का डाटा और बैंक खातों की व्यवस्था आशीष शर्मा द्वारा की जाती थी।
तीन राज्यों में ठगी, अन्य मामलों की जांच जारी: पुलिस को आरोपियों से बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अब तक गाजियाबाद के रमेश कुमार शर्मा से 11 लाख रुपये, महाराष्ट्र के डोंबिवली निवासी सतीश विनायक नाके से 9.87 लाख रुपये और तेलंगाना के हैदराबाद निवासी बृजेश कुमार मौर्य से 2.50 लाख रुपये की ठगी के मामले सामने आए हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन से अन्य लोगों के साथ हुई व्हाट्सऐप चैट भी बरामद हुई हैं। पुलिस इन चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर साइबर ठगी की अन्य घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।

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-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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