गाजियाबाद में हाउस टैक्स वृद्धि के विरोध में छठे दिन भी जारी रहा व्यापारियों का धरना

बाजार बंद कराने पर मंथन: व्यापारियों ने कहा-जनता पर डाला गया अतिरिक्त आर्थिक बोझ स्वीकार नहीं

गाजियाबाद।
नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स में की गई भारी वृद्धि के विरोध में हाउस टैक्स विरोधी संघर्ष समिति के तत्वावधान में नवयुग मार्केट में व्यापारियों का धरना मंगलवार को छठे दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर आयोजित बैठक में आंदोलन को शहर के अन्य बाजारों तक पहुंचाने तथा मांगों के समर्थन में बाजार बंद कराने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया गया। धरने पर बैठे व्यापारियों ने कहा कि पिछले छह दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन चल रहा है, लेकिन नगर निगम की ओर से बढ़े हुए हाउस टैक्स को वापस लेने के संबंध में अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाते हुए शहर के प्रमुख बाजारों को बंद कराने का निर्णय लिया जा सकता है।
हाउस टैक्स विरोधी संघर्ष समिति के आयोजक राजकिशोर गुप्ता ने कहा कि नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स में की गई बेतहाशा वृद्धि से व्यापारियों के साथ-साथ आम शहरवासियों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों और नागरिकों के हित में नगर निगम को बढ़ी हुई दरों पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए तथा वर्ष 2024 में निर्धारित दरों के आधार पर हाउस टैक्स की गणना और वसूली की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति टकराव की स्थिति नहीं चाहती और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रही है। इसके बावजूद यदि नगर निगम लगातार मांगों की अनदेखी करता है तो व्यापारियों के पास आंदोलन को व्यापक करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा।
बाजार बंद कराने पर सामूहिक निर्णय की तैयारी: बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा करते हुए कहा गया कि यदि नगर निगम ने बढ़े हुए हाउस टैक्स को वापस लेने की मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो शहर के विभिन्न बाजारों के व्यापार मंडलों से संपर्क किया जाएगा। इसके बाद बाजार बंद कराने के संबंध में सामूहिक निर्णय लिया जा सकता है। व्यापारियों ने कहा कि बाजार बंद करना उनकी पहली प्राथमिकता नहीं है, लेकिन शांतिपूर्ण धरने, ज्ञापन और वार्ता के प्रयासों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होता है तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध को प्रभावी बनाना आवश्यक होगा। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में विभिन्न बाजारों के व्यापार मंडलों, व्यापारियों, आरडब्ल्यूए और सामाजिक संगठनों से संपर्क कर आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
5 से 25 गुना तक बढ़ोतरी का आरोप:
 धरने पर मौजूद व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कई संपत्तियों पर हाउस टैक्स में पांच गुना से लेकर 25 गुना तक वृद्धि का प्रभाव दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि अचानक हुई इतनी बड़ी वृद्धि से संपत्ति स्वामियों और कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ा है। व्यापारियों ने नगर निगम से हाउस टैक्स की नई दरों और गणना प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई दरों की समीक्षा कर पुराने आधार पर टैक्स निर्धारित किया जाना चाहिए।
छोटे दुकानदारों को 70 प्रतिशत छूट के दावे पर उठे सवाल: धरना स्थल पर नगर निगम की ओर से छोटे दुकानदारों को हाउस टैक्स में 70 प्रतिशत तक की छूट दिए जाने संबंधी दावों पर भी चर्चा हुई। पूर्व पार्षद एवं आरटीआई कार्यकर्ता मुनीन्द्र आर्य ने नगर निगम अधिकारियों की ओर से इस संबंध में दिए गए कथित बयानों पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि शासनादेश और लागू नियमों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किन श्रेणियों के करदाताओं को कितनी छूट का प्रावधान है। समिति ने कहा कि आंदोलन को अब शहर के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए विभिन्न बाजारों और व्यापारिक संगठनों से संपर्क किया जाएगा। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि बढ़ा हुआ हाउस टैक्स वापस होने तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर चरणबद्ध तरीके से इसे और व्यापक किया जाएगा।
धरना स्थल पर व्यापारियों ने एक स्वर में कहा, “हाउस टैक्स की बेतहाशा वृद्धि वापस लो, व्यापारियों और शहरवासियों को राहत दो।” धरने में राजकिशोर गुप्ता, गौरव गर्ग, रजनीश बंसल मंगली, सुभाष छाबड़ा, गौरव बंसल (आरडब्ल्यूए), हरविंदर गांधी, आरडब्ल्यूए फेडरेशन के संरक्षक प्रेमचंद गुप्ता, सुभाष गुप्ता, प्रीतम लाल, तिलक राज अरोड़ा, मुनीन्द्र आर्य, राज कुमार आर्य, विशाल वर्मा, सतीश शर्मा (पूर्व मंत्री), अनिल गुलाटी, मोहित राजपूत, नरेंद्र वर्मा, मुनेश कुमार, नसीम, सुनील चाचा, सोनू सिंघल और लोकेश कुमार सहित सैकड़ों व्यापारी एवं नागरिक मौजूद रहे।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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