टेक्सटाइल प्रोसेसिंग और डाइंग की दरों में 20 से 30% वृद्धि पर सहमति

कच्चे माल, डीजल-गैस, बिजली, केमिकल और परिवहन लागत बढ़ने का हवाला; उद्योग संगठनों ने कहा—पुरानी दरों पर काम करना मुश्किल

साहिबाबाद/गाजियाबाद।
दिल्ली-एनसीआर के टेक्सटाइल प्रोसेसिंग और डाइंग उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रोसेसिंग रेट में 20 से 30 प्रतिशत तक संशोधन (वृद्धि) करने पर सहमति बनी। उद्योग प्रतिनिधियों ने बढ़ती उत्पादन लागत को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया है। बैठक का आयोजन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ट्रांस हिंडन साहिबाबाद, टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन ऑफ हरियाणा तथा दिल्ली-एनसीआर टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में किया गया। इसमें दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद समेत एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एवं डाइंग इकाइयों के कारोबारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। 
केमिकल, बिजली और गैस की बढ़ती कीमतों का असर: बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में केमिकल, डाई, बिजली, गैस, ईंधन और परिवहन समेत उत्पादन से जुड़ी विभिन्न लागतों में लगातार वृद्धि हुई है। इसके चलते टेक्सटाइल प्रोसेसिंग और डाइंग इकाइयों के लिए पुरानी दरों पर काम करना मुश्किल हो गया है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार बढ़ती लागत का सीधा असर उत्पादन लागत और इकाइयों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि उद्योग की निरंतरता बनाए रखने और गुणवत्ता प्रभावित होने से बचाने के लिए प्रोसेसिंग दरों में संशोधन आवश्यक हो गया था। 
'रेट बढ़ाना मुनाफा बढ़ाने के लिए नहीं': बैठक में शामिल उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि दरों में संशोधन का उद्देश्य मुनाफा बढ़ाना नहीं, बल्कि बढ़ती लागत के बीच उद्योग की संचालन क्षमता बनाए रखना है। उन्होंने कपड़ा निर्माताओं, गारमेंट निर्यातकों और टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़े अन्य कारोबारी साझेदारों से इस निर्णय को उद्योग की मौजूदा परिस्थितियों के संदर्भ में समझने और सहयोग करने की अपील की। प्रतिनिधियों ने कहा कि सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद दरों में संशोधन को लेकर सर्वसम्मति बनी है। उनका कहना है कि इससे टेक्सटाइल सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी। 
अशोक चौधरी ने कहा-लागत और प्रोसेसिंग रेट में संतुलन जरूरी: 
इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ट्रांस हिंडन साहिबाबाद के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि उद्योग की निरंतरता के लिए लागत और प्रोसेसिंग रेट के बीच उचित संतुलन जरूरी है। बढ़ती लागत का असर इकाइयों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रयास ऐसा व्यावहारिक समाधान निकालना है, जिससे उद्योग और उसके कारोबारी साझेदारों के बीच संतुलन बना रहे। बैठक में संगठन के महासचिव संजीव त्यागी, आरपी शर्मा, एमपी शर्मा, रविंदर पाल सिंह, राजीव रस्तोगी, दिल्ली-एनसीआर टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस.डी. खेत्रपाल, टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन ऑफ हरियाणा के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।बैठक में अनिल जैन, अरुण जैन, किशन कुमार, रौनक खेत्रपाल, सौरव खेत्रपाल, नवीश खेत्रपाल, गिरीश वासन, अविनाश जैन, अजय जैन, किशन जैन, जीबी प्रसाद, श्रेय गिरोत्रा, मोहित हिमांशु, शक्ति सचदेव, गौरव आहूजा, जे.एन. रस्तोगी, संजीव जैन, अनूप अरोरा और आदित्य समेत विभिन्न टेक्सटाइल एवं प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़े उद्योगपति एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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