चार गिरफ्तार, दुकानदार ही निकला मास्टरमाइंड
नोए़डा। दिल्ली-एनसीआर में मोबाइल स्नैचिंग का एक ऐसा नया तरीका सामने आया है। आमतौर पर लुटेरे मोबाइल छीनकर उसे सस्ते दामों में बेच देते हैं या आईएमईआई (IMEI) नंबर बदलवते हैं, लेकिन नोएडा पुलिस के हत्थे चढ़ा यह गैंग लूटे गए मोबाइलों का वजूद ही मिटा देता था। थाना सेक्टर-58 पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसका सरगना एक मोबाइल रिपेयरिंग शॉप का मालिक है। यह गिरोह़ लूटे गए मेबाइलों को बेचता नहीं था, बल्कि दुकान में ले जाकर उनके एक-एक पुर्जे (पार्ट्रस) को अलग कर देता फिर इन पार्ट्स को नया बताकर रिपेयरिंग के लिए आने वाले ग्रहकों के फोन में लगा देता था। इस तरह आरोपी एक फोन से 20 से 25 हजार रुपये तक कमा लेते थे और पुलिस को मोबाइल ट्रैक करने के लिए कोई आईएमईआई नंबर भी एक्टिव नहीं मिलता था। डीसीपी जोन प्रथम यमुना प्रसाद ने बताया कि शहर में मोबाइल स्नैचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एक विशेष टीम का गठन किया गया था। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और लोकल इंटेलिजेंस से पता चला कि कुछ संदिग्ध सेक्टर-60 बिल्मर कंपनी के पास सर्विस रोड पर फिर से वारदात की फिराक में घूम रहे हैं। पुलिस ने घेराबंदी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से चोरी और लूट के 52 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिनमें से 12 दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमो से लिंक हो चुके हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय निवासी बस्ती, अमन निवासी मैनपुरी, रितेश निवासी चोटपुर कॉलोनी, नोएडा और कमरू निवासी मोतिहारी बिहार के रूप में हुई है। डीसीपी ने बताया कि आरोपी पहले भी पुलिस मुठभेड़ में जेल जा चुका है। सेक्टर-63 में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है। बाकी तीन साथी विजय, अमन और कमरू सड़कों पर मोबाइल और लैपटॉप स्नैचिंग करते थे और माल सीधे रितेश की दुकान पर पहुंचाते थे।