30 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की खंगाली जा रही कुंडली
गाजियाबाद। जिले में पासपोर्ट के फर्जीवाड़े में दो दिन पहले पोस्टमैन और एक महिला समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच की आंच खाकी तक पहुंचने लगी है। इसी के तहत मंगलवार को पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई की गई। मामले में मंगलवार को भोजपुर थाने के आठ दारोगा को लाइन हाजिर किया गया है। थाने के मुंशी दीपक कुमार ने इन्हीं दारोगाओं की आईडी का प्रयोग कर थाने में ही बैठकर पासपोर्ट वेरिफिकेशन कर दिए थे।
भोजपुर क्षेत्र के नाम और पतों पर जारी हुए पासपोर्ट के मामले में पुलिस 30 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की कुंडली खंगाल रही है। इनमें एजेंट, पुलिसकर्मी, डाक विभाग के कर्मचारी और पासपोर्ट हासिल करने वालों से जुड़े नंबर हैं। जिन नंबरों से एजेंट विवेक गांधी और प्रकाश सुब्बा की बातचीत हुई है उन नंबरों के सहारे पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही है। पुलिस की चार टीमें 22 आरोपितों की तलाश में हैं। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद ही पता चलेगा कि उन्होंने किस उद्देश्य से फर्जीवाड़ा कर पासपोर्ट हासिल किए हैं।
अंतरराज्यीय गिरोह ऐसे करता था काम: पुलिस सूत्रों के अनुसार, फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले इस गिरोह के तार कई राज्यों में फैले हैं। गिरोह न्यायिक कार्यवाही से बचने के लिए अपराधियों, वांछितों, पैरोल जंपर्स व अन्य लोगों के फर्जी पासपोर्ट तैयार कर उन्हें विदेश भेजने में सहयोग करता था। इसके लिए फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड भी तैयार किए जाते थे।
प्रति पासपोर्ट एक से दो लाख रुपये वसूलते थे: पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह एक फर्जी पासपोर्ट बनाने के लिए एक से दो लाख रुपये तक वसूलता था। पुलिस को सत्यापन करने के नाम पर 15 हजार और पोस्टमैन को इसकी रिपोर्ट मुहैया कराने के लिए दो से पांच हजार रुपये प्रति पासपोर्ट रिश्वत दी जाती थी।
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