सीएजी की रिपोर्ट कर रही इशारा-भ्रष्टाचार का दलदल बना गाजियाबाद विकास प्राधिकरण

जीडीए के अफसरों ने कराया 469 करोड़ का नुकसान, दावों की खुली कलई

गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण विकास प्राधिकरणों में से एक, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) भ्रष्टाचार और लापरवाही के दलदल में फंसता नजर आ रहा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश हुई भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने जीडीए के दावों की हवा निकाल दी है. वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच हुए कार्यों की इस जांच में पता चला है कि अफसरों की मिलीभगत और सुस्ती के कारण सरकारी खजाने को 469 करोड़ रुपये का सीधा चपत लगा है. सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि एक तरफ सरकार ‘सबको आवास’ का नारा दे रही है, वहीं जीडीए गरीबों के हक के घर बनाने में पूरी तरह नाकाम रहा है.
गरीबों के आशियाने पर ‘सिस्टम’ का ग्रहण: सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट (2017-18 से 2021-22) में सबसे चौंकाने वाला खुलासा गरीबों के आवास को लेकर हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि के दौरान प्राधिकरण को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 25,000 मकान बनाने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन हकीकत में सिर्फ 9,960 मकान ही बन पाए. यानी लक्ष्य का 60 प्रतिशत हिस्सा फाइलों में ही दबा रह गया. यही हाल प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) का भी रहा. जहां 45,000 यूनिट का लक्ष्य था, वहां केवल 20,173 यूनिट की ही योजना बनी और मार्च 2024 तक केवल 5,801 मकान ही निर्माणाधीन थे. सिस्टम की यह सुस्ती सवाल उठाती है कि क्या विकास केवल कागजों तक सीमित है?
इंटीग्रेटेड टाउनशिप में भी आधा काम अधूरा: इंटीग्रेटेड टाउनशिप के तहत सात प्रमुख बिल्डरों को कुल 3,469 ईडब्ल्यूएस और 3,469 एलआईजी भवन बनाने थे। मगर अब तक केवल 1,709 ईडब्ल्यूएस और 1,552 एलआईजी भवन ही पूरे हुए हैं। यानी 50 प्रतिशत से अधिक कार्य अभी भी लंबित है। नियमों के अनुसार, हाईटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप विकसित करने वाले बिल्डरों को कुल विकसित भूमि के अनुपात में एक निश्चित प्रतिशत ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास बनाना अनिवार्य होता है। विश्लेषण से स्पष्ट है कि बिल्डरों ने सड़क, बिजली, पानी जैसी भौतिक सुविधाओं पर ध्यान दिया, लेकिन सामाजिक दायित्व के तहत गरीबों के आवास निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी। शुरुआत में जीडीए की ढिलाई के कारण भी यह स्थिति बनी।
राजस्व वसूली में भारी फेलियर, 469 करोड़ का हिसाब गायब: रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अफसरों ने बिल्डरों और आवंटियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 154.02 करोड़ रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर अधिभार 422 आवंटियों से वसूला ही नहीं गया. 21.86 करोड़ रुपये बिल्डरों से प्रशासनिक प्रभार और लैंड यूज चार्ज के रूप में बकाया छोड़ दिए गए. 25.69 करोड़ रुपये का सीधा फायदा मानचित्र और विकास शुल्क कम लगाकर चहेतों को पहुंचाया गया.
बिल्डरों पर मेहरबानी, सरकारी खजाने को चपत: यही नहीं, निजी बिल्डरों पर मेहरबानी का आलम यह रहा कि हाई-टेक टाउनशिप प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों को 20% मकान गरीबों के लिए बनाने थे. इसके तहत 6,382 मकान बनने थे, लेकिन बने केवल 2,133. चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर उल्लंघन के बावजूद जीडीए ने डिफाल्टर बिल्डरों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की.
बिना मास्टर प्लान के बना दी 1200 करोड़ की सड़क: जीडीए की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल 6-लेन हिंडन एलिवेटेड रोड को लेकर उठा है. लगभग 1089 करोड़ (अनुमानित 1200 करोड़) की लागत से बनी यह शानदार सड़क मास्टर प्लान 2021 का हिस्सा ही नहीं थी. बिना प्लान में शामिल किए इतनी बड़ी परियोजना को अंजाम देना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है. इसके अलावा, लैंड बैंक बनाने में भी जीडीए फिसड्डी रहा, 300 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले महज 18.32 हेक्टेयर जमीन ही अधिग्रहित की गई.
अवैध निर्माण को ‘मौन’ समर्थन और मास्टर प्लान में झोल: सीएजी ने हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बढ़ते अवैध निर्माण पर भी गंभीर आपत्ति जताई है. रिपोर्ट के मुताबिक, अवैध निर्माण को गिराने की दर मात्र 19 से 65 प्रतिशत रही. कई मामलों में तो बिना अवैध निर्माण ध्वस्त किए ही सेटिंग-गेटिंग के जरिए नक्शे पास कर दिए गए. प्राधिकरण की लापरवाही यहीं नहीं रुकी. गाजियाबाद और मोदीनगर के लिए एक संयुक्त मास्टर प्लान बनाने के बजाय अलग-अलग प्लान बनाए गए, जिन्हें एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से मंजूरी तक नहीं मिली. इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण विकास योजनाएं 4 से 10 साल पिछड़ गईं.
बहानेबाजी और शासन की प्रतिक्रिया: जब इन खामियों पर सवाल उठे, तो अधिकारियों ने कम राजस्व वसूली के लिए ‘कोरोना महामारी’ और ‘संपत्तियों की कम बिक्री’ का बहाना बनाया. हालांकि, मेरठ मंडलायुक्त ने अब इस रिपोर्ट पर कड़ा रुख अपनाया है और जीडीए को विस्तृत जवाब तैयार करने के निर्देश दिए हैं. जीडीए सचिव विवेक मिश्रा का कहना है कि ऑडिट में बताए गए बिंदुओं का पालन किया जाएगा और उचित जवाब भेजा जाएगा.
सीएजी रिपोर्ट की आपत्तियों के बाद जीडीए फाइनल रिपोर्ट तैयार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, जिन बिल्डरों ने 50 प्रतिशत से कम लक्ष्य पूरा किया है, उन पर भारी जुर्माना लगाने और नई परियोजनाओं की अनुमति रोकने की तैयारी है। जीडीए के वीसी नंद किशोर कलाल ने कहा कि बिल्डरों को तय समयसीमा के भीतर ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास बनाकर आवंटन करना होगा। साथ ही उनसे परफॉर्मेंस गारंटी और टाइम-बाउंड चार्ट मांगा जाएगा। अनुपालन न होने पर दंडात्मक कार्रवाई निश्चित है। विधानसभा में मामला उठने के बाद शासन स्तर से भी रिपोर्ट मांगी गई है, जिससे कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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