डरावना सच: दिल्ली बनी 'लापतागंज'

27 दिन में 807 लोग लापता, हर दिन दिल्ली से 27 लोग हो रहे लापता, सिर्फ 9 को ही खोज पा रही पुलिस


नई दिल्ली। 2026 का नया साल शुरू हुआ और दिल्ली में पहले ही 27 दिनों में ऐसा आंकड़ा आया है जिसने चौंका दिया। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 27 दिन में 807 लोग लापता हुए है।देखा जाए तो हर रोज़ औसतन 29 से ज्यादा लोग गायब हुए। इनमें से पुलिस ने 235 को ढूंढ लिया जो अच्छी बात है लेकिन 572 अभी भी कहीं अंधेरे में खोए हुए हैं। असली चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें 137 बच्चे शामिल हैं। इन 137 बच्चों में से ज्यादातर लड़कियां हैं।
0-8 साल के बच्चे भी हो रहे शिकार: बच्चों के बीच उम्र के हिसाब से डेटा पर करीब से नज़र डालने पर चिंताजनक ट्रेंड सामने आते हैं। 0-8 साल के एज ग्रुप में, 2026 के पहले 27 दिनों में नौ बच्चे लापता हुए। उनमें से तीन का पता लगा लिया गया है, जबकि बाकी छह को ढूंढने की कोशिशें जारी हैं। इसकी तुलना में, 2025 में इस एज ग्रुप के 368 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 149 का पता लगा लिया गया और 219 का पता नहीं चला।
ऐसा सीसीटीवी वीडियो वायरल: बच्चों के लापता होने के मामलों के बीच एक सीसीटीवी फुटेज तेजी से वायरल हो रहा है। ये फुटेज कथित तौर पर बच्चों की किडनैपिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। यह वीडियो सीसीटीवी का फुटेज है जिसमें दिखता है कि एक गाड़ी बच्चों के पास आकर रुकती है और इस दौरान बच्चे वहां से भाग जाते हैं। कथित तौर पर माना जा रहा है कि ये किडनैपिंग का वीडियो है। वायरल हो रहे वीडियो में दिखता है कि स्कूल के 2 बच्चे बैग लटका कर सड़क किनारे जा रहे हैं तभी पीछे से एक सफेद कार आती है और तेजी से आती हुई कार के ब्रेक बच्चों के पास आकर रुक जाती है। इस दौरान तेजी से एक शख्स गाड़ी का गेट खेलकर बाहर निकलता है और जैसे ही बच्चों की ओर चलता है वैसे ही बच्चे समझदारी दिखाते हुए वहां से भाग जाते हैं। अब ये वीडियो कथित तौर पर किडनैपिंग का बताया जा रहा है। ये वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. लोग इसे दिल्ली में लापता हुए लोगों से जोड़कर देख रहे हैं।
दिल्ली पुलिस बोली-किसी संगठित गिरोह का हाथ नहीं: दिल्ली पुलिस ने साफ किया कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने और अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस ने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह के अफवाह पर ध्यान न दें। पुलिस ने चेतावनी दी कि अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय त्यागी ने कहा कि दिल्ली पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि लापता व्यक्तियों से संबंधित सभी मामलों का Registration और तुरंत जांच की जाए और सभी संभव प्रयास कर लापता व्यक्तियों को शीघ्रातिशीघ्र उनके परिजनों से मिलाया जाए। दिल्ली पुलिस आपकी सेवा में सदैव तत्पर है। वहीं दिल्ली में लापता लोगों की संख्या को लेकर पुलिस की ओर से भी एक आंकड़ा जारी किया गया। एक दिन पहले पुलिस की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार शहर में लापता लोगों की संख्या लगभग एक दशक से स्थिर बनी हुई है। 2016 से यह आंकड़ा प्रति वर्ष 23 हजार से 24 हजार के आसपास रहा है।
11 सालों में 5559 बच्चे लापता: पिछले आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि ये मामला कोई नया नहीं है। बीते सालों के जिनपेट जैसे पुलिस डाटाबेस के आंकड़े बताते हैं कि 2015 से 2025 तक हजारों लोग लापता हुए, जिनके मामले दर्ज किए गए। लापता हुए इन लोगों में कई का आज भी पता नहीं चला है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अगर 11 सालों की बात करें तो 5559 बच्चे गायब हुए हैं. इनमें 695 बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला है। साल बदलते जा रहे हैं, लेकिन लापता बच्चों और लोगों के आंकड़े कम नहीं हो रहे। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन बच्चों और लोगों का कोई सुराग नहीं मिलता, उनके साथ आखिर क्या हुआ, इसका जवाब अब तक किसी के पास नहीं है।
राज्य सभा में उठा लापता बच्चों का मुद्दा: देश की राजधानी दिल्ली में लापता बच्चों का मुद्दा गुरुवार राज्यसभा में उठा। आम आदमी पार्टी के सांसद संदीप कुमार पाठक ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली में बच्चों की चोरी का मामला रखना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि आरटीआई के जवाब में दिल्ली पुलिस ने बताया है कि 2024 से हर साल 6 हजार बच्चे लापता हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा कि यह सिर्फ 2024 तक ही सीमित नहीं है। इतना ही नहीं इनमें अधिकांश संख्या गर्ल चाइल्ड की है। पाठक ने सदन का ध्यान इस मुद्दे की ओर दिलाते हुए कहा कि हर साल 6 हजार से 7 हजार बच्चे लापता हो रहे हैं उनमें 72 प्रतिशत संख्या गर्ल चाइल्ड की है। देश की राजधानी दिल्ली से हर दिन 17 बच्चे गायब हो रहे हैं। आप सांसद ने बड़े शहरों से इसकी तुलना करते हुए कहा कि मुंबई, बंगलुरु, कोलकाता के मुकाबले दिल्ली में मिसिंग बच्चों की संख्या अधिक है।
बहरहाल, दिल्ली जैसे महानगर में जहां चप्पे-चप्पे पर कैमरे होने का दावा किया जाता है, वहां बच्चों का इस तरह गायब हो जाना और हफ्तों-महीनों तक कोई सुराग न मिलना बेहद चिंताजनक है।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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