भारतीय किसान एकता संघ व भाकियू (अंबावत) ने शालीमार गार्डन एसीपी को सौंपा ज्ञापन, 10 मार्च को महापंचायत का ऐलान
साहिबाबाद। अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत भोपुरा के किसानों को अब नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। उनकी मांग अब तक अधूरी है, इस बीच यहां के तीन गाँवों के किसानों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने से किसानों में पुलिस-प्रशासन के खिलाफ असंतोष गहरा गया है और उन्होंने इसे अन्याय पूर्ण करार दिया है। किसानों का कहना है कि आवास विकास परिषद के अधिकारियों द्वारा किसानों पर झूठे मुकदमें दर्ज कराए गए है। इन एफआईआर को निरस्त किया जाए।सोमवार को भारतीय किसान एकता संघ और भाकियू (अम्बावत) की अगुवाई में किसानों व ग्रामीणों ने शालीमार गार्डन एसीपी कार्यालय पर पहुंचकर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की। किसानों व ग्रामीणों का कहना था कि हाईकोर्ट से स्टे होने के बाद भी आवास विकास परिषद किसानों की जमीन को कब्जाना चाह रही हैं जिसके विरोध में किसानों ने हंगामा किया तो किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। नाराज किसानों ने सोमवार को शालीमार गार्डन के एसीपी अतुल कुमार सिंह को ज्ञापन दिया वही होली के बाद किसान 9 मार्च को डीएम और डीसीपी से भी मिलकर किसानों पर दर्ज एफआईआर निरस्त कराने की मांग करेंगे। किसान नेताओं ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि एफआईआर निरस्त नही हुई तो 10 मार्च को भोपुरा चौक पर विशाल महांपचायत कर धरना दिया जाएगा।
काबिलेगौर है कि जिन तीन गाँवों के किसानों पर एफआईआर दर्ज है उनमें गांव भोपुरा, निस्तौली और सिकंदरपुर गांव के किसान शामिल हैं। प्रशासन के खिलाफ गांव के लोगों मे आक्रोश व्याप्त हैं वही भारतीय किसान एकता संघ के उत्तर प्रदेश प्रभारी चौधरी सेवाराम कसाना ने बताया कि बीती 18 फरवरी को आवास विकास के लोग आये थे। उनके साथ 4-5 सुरक्षाकर्मी थे। एक्सईएन बहादुर राम के कहने पर ही काम कर रहे मजदूरों को मारपीट कर भगा दिया गया था। गांव के किसानों को आता देखकर सभी लोग भाग गए थे और एसीपी कार्यालय में पहुंच कर किसानों के खिलाफ तहरीर दे दी। जैसे ही गांव के किसानों को पता चला तो किसान भी शालीमार गार्डन एसीपी कार्यालय पहुच गए और किसानों की तरफ से भी एक तहरीर आवास विकास के अधिकारियों के खिलाफ दी गई। लेकिन पुलिस ने एकतरफा रूख अख्तियार करते हुए किसानों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है। इसी को गुस्साए ग्रामीण किसानों ने सोमवार को एसीपी कार्यालय का घेराव किया। साथ ही ज्ञापन और इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की कॉपी देते हुए किसानों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की पुरजोर मांग की। श्री कसाना ने बताया कि उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के अधिकारियों द्वारा किसानों पर झूठे मुकदमें दर्ज कराए गए हैं, जो सरासर गलत और अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में आवास विकास के तत्कालीन कमिश्नर अजय चौहान द्वारा किसानों के साथ वार्ता की गई थी जिसमें किसानों को उनकी भूमि के बदले 25 प्रतिशत विकसित प्लॉट देने का वादा किया गया था। किसानों से आवेदन फार्म भी भरवाए गए थे किन्तु आज तक उस समझौते पर कोई कार्रवाई नहीं की हुई। बार-बार किसानों को गुमराह किया जा रहा है। एसीपी को ज्ञापन देने वालों में चौधरी सेवा राम कसाना, गजराज कसाना, श्रीकेश कसाना, जगत सिंह कसाना, अशोक दरोगा, विक्रम कसाना, अमित कसाना, जिलाध्यक्ष (अम्बावत) महिपाल कसाना भारतीय किसान यूनियन नवीन कसाना विनोद कसाना पवन कसाना महाराज सिंह चौधरी प्रमोद शर्मा प्रदेश अध्यक्ष किसान एकता संघ पपे नागर आदि मौजूद रहे।
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गाजियाबाद