हरीश राणा के परिवार की आजीविका के लिए आगे आया शासन-प्रशासन

सुप्रीम कोर्ट से हरीश राणा की इच्छामृत्यु की मंजूरी के बाद परिजनों से मिलने आवास पर पहुंचे जिलाधिकारी, जीडीए वीसी और नगरायुक्त
परिवार को आर्थिक, रोजगार सहित अन्य योजनाओं का दिलाया जायेगा लाभ: जिलाधिकारी

गाजियाबाद। जनपद गाजियाबाद के हरीश राणा की 13 साल लंबी पीड़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भावुक फैसला सुनाया. अदालत ने 'पैसिव यूथेनेशिया' की मंजूरी देते हुए हरीश को एम्स में भर्ती करने और प्राकृतिक मृत्यु की ओर बढ़ने की इजाजत दी है। हालांकि यह मंजूरी परिवार की गुहार लगाने के बाद ही दी गई है, फिर भी मंजूरी मिलते ही हरीश के पिता अशोक राणा भावुक हुए और उनकी आँखों से आँसू बह निकले। बेटे से जुदाई की आती विपदा की घड़ी में शासन-प्रशासन राणा परिवार के लिए आगे आया है। सुप्रीम कोर्ट के संवेदनशील और ऐतिहासिक निर्णय के बाद बुधवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिलाधिकारी रवीन्द्र कुमार माँदड़, जीडीए वीसी नन्दकिशोर कलाल और नगरायुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी के फ्लैट संख्या ए-एम-1314, 13वीं मंजिल में निवास कर रहे अशोक राणा एवं उनके परिवार से मुलाकात की और वर्तमान परिस्थिति जानी।
उक्त परिवार मूल रूप से जनपद कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश का निवासी है। परिवार के मुखिया अशोक राणा पूर्व में आईजीआई एयरपोर्ट, नई दिल्ली स्थित एक निजी होटल में वर्ष 1989 से फरवरी 2021 तक कार्यरत रहे तथा सेवानिवृत्ति के उपरांत वर्तमान में पेंशन के रूप में प्राप्त सीमित धनराशि एवं घर पर खाद्य सामग्री बनाकर विक्रय कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। परिवार में उनके तीन संतान हैं, जिनमें एक पुत्र गुरुग्राम में निजी नौकरी कर रहा है, एक पुत्र हरीश राणा (जो कि लगभग पिछले 13 वर्षों से कोमा में है और परिवार जनों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु हेतु निवेदन किया गया था, सुप्रीम कोर्ट द्वारा शर्तों पर अनुमति प्रदान की गयी है।) तथा पुत्री का विवाह हो चुका है, जो वर्तमान में गाजियाबाद में ही निवास कर रही हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशन पर इस दु:ख की घड़ी में जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल तथा नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक द्वारा हरीश राणा के परिवारजनों को ढढांस बांधते हुए परिवार की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया। उन्होंने परिवार की सहमति से उनके स्थायी आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। 
जिलाधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि परिवार को तत्काल जन सहयोग से 2,50,000 (ढाई लाख रुपये) की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गयी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री विवेक राहत कोष से भी सहायता प्रदान की जायेगी। उनके जीवन यापन के लिए रोजगार हेतु उन्हें दुकान आवंटित की जायेगी। इसके अतिरिक्त शासन द्वारा संचालित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से भी परिवार को लाभान्वित कराया जाएगा, जिससे उनके जीवनयापन में स्थिरता एवं आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो सके। जिला प्रशासन द्वारा आश्वस्त किया गया कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार परिवार के अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जाएगा।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने