दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने जिला कारागार में शुरू की पहचान प्रक्रिया
गाजियाबाद। जिले में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा एक सराहनीय पहल की शुरूआत की गई है, जो जेल में बंद निरुद्ध बंदियों के जीवन को आसान बनाएगी। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और जिला कारागार द्वारा संयुक्त रूप से इस पहल को धरातल पर उतारने की कवायद शुरू कर दी गई है। दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय के निदेर्शों के क्रम में इस नई पहल की शुरूआत की गई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य है कि जेल में बंद कोई भी दिव्यांग बंदी विभाग की कोई योजनाओं से वंचित न रहे। इसी क्रम में शुक्रवार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा जिला कारागार गाजियाबाद का निरीक्षण किया गया है, जिसमें जेल में मौजूद दिव्यांग बंदियों की पहचान की गई।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने बताया, जिला कारागार गाजियाबाद में कई दिव्यांग बंदियों के पास दिव्यांत प्रमाण पत्र नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए विभाग द्वारा विशेष योजना बनाई गई है। आमतौर पर दिव्यागता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला एमएमजी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड के सामने दिव्यांग व्यक्ति को उपस्थित होना होता है। अंशुल चौहान ने आगे बताया, प्रत्येक सोमवार को एमएमजी अस्पताल में मेडिकल बोर्ड बैठता है। दिव्यांग बंदियों के लिए जेल परिसर में ही मेडिकल बोर्ड का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार किया जाएगा और एक दिन के लिए जेल में ही मेडिकल बोर्ड बैठेगा। जेल परिसर में ही दिव्यांग, मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होंगे। मेडिकल बोर्ड द्वारा दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए बंदियों के पास सभी आवश्यक दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड बैंक खाता आदि उपलब्ध हों।
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