कोटेदार की शिकायत पर मेरठ विजिलेंस टीम का बागपत में बड़ा एक्शन: क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी पर पैसे लेकर भागने का आरोप
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में विजिलेंस टीम ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) अनूप तिवारी को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने उन्हें उनके ही कार्यालय से दबोचा। आरोप है कि वह एक राशन डीलर से कमीशन के नाम पर लगातार रिश्वत मांग रहे थे और पैसे न देने पर लाइसेंस निरस्त करने की धमकी दे रहे थे। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम जिला पूर्ति अधिकारी अनूप तिवारी को कोतवाली ले गई, जहां उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, मामले में नामजद क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी (ARO) योगेंद्र सिंह पर 10 हजार रुपए लेकर मौके से फरार होने का आरोप लगा है। दोनों अधिकारियों ने कोटेदार से कमीशन के रूप में रकम वसूली। दो दिन पहले ही दो पूर्ति निरीक्षक को शासन ने निलंबित किया था।
राशन डीलर ने खोला रिश्वतखोरी का खेल: सिंघावली अहीर क्षेत्र के बुढ़सैनी गांव निवासी नरेंद्र कुमार सरकारी राशन डीलर हैं। नरेंद्र ने चार दिन पहले विजिलेंस विभाग से शिकायत की थी कि DSO अनूप तिवारी उनसे पिछले कई महीनों से कमीशन मांग रहे थे। आरोप है कि प्रति क्विंटल राशन वितरण पर 25 रुपए की मांग की जा रही थी। नरेंद्र कुमार के अनुसार, “मुझ पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। कहा गया कि 5-6 महीने से ज्यादा हो गए हैं, कम से कम 30-40 हजार रुपए लेकर आओ। पैसे न देने पर दुकान खत्म करने और लाइसेंस निरस्त करने की धमकी दी जाती थी।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ARO योगेंद्र सिंह ने पहले ही 10 हजार रुपए ले लिए थे और अन्य कर्मचारियों के जरिए लगातार फोन कराकर दबाव बनाया जा रहा था।
ऐसे बिछाया गया विजिलेंस का जाल: शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने पूरा प्लान तैयार किया। शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे से 5 सदस्यीय टीम जिला पूर्ति कार्यालय के आसपास सक्रिय हो गई। शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार लगातार टीम के संपर्क में बने रहे। करीब 2:15 बजे नरेंद्र कुमार कार्यालय पहुंचे। जैसे ही उन्होंने अनूप तिवारी को 40 हजार रुपए दिए, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ARO योगेंद्र सिंह मौके से फरार हो गए। उनकी तलाश की जा रही है।
पहले भी लग चुके हैं रिश्वतखोरी के आरोप: बताया जा रहा है कि अनूप तिवारी पिछले दो वर्षों से बागपत में तैनात हैं। इससे पहले उनकी पोस्टिंग जालौन में थी। वर्ष 2024 में गैस एजेंसी संचालकों ने भी उनके खिलाफ हड़ताल कर रिश्वत मांगने के आरोप लगाए थे। अब विजिलेंस की कार्रवाई के बाद खाद्य एवं रसद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले को लेकर विभागीय जांच भी शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कारनामों की पोल खोलने में जुटे अफसर: निलंबित पूर्ति निरीक्षक राहुल पटेल का कहना है कि जिला पूर्ति अधिकारी अनूप तिवारी कोटेदार से अवैध वसूली करते हैं। इसके लिए उन पर भी दबाव बनाया जा रहा था। ऐसा करने से मना किया तो उनकी झूठी शिकायत उच्चाधिकारियों को कर दी गई। इसी वजह से उनके अलावा पूर्ति निरीक्षक दीपक कुमार को शासन ने निलंबित कर दिया। वहीं, जिला पूर्ति अधिकारी ने दोनों पूर्ति निरीक्षक पर भ्रष्टाचार व दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था।
भ्रष्टाचार की जड़ें हुए गहरी: सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो गई हैं। पिछले चार माह के अंदर अलग-अलग तीन विभागों में एंटी करप्शन और विजिलेंस की टीम ने छापामारी कर भ्रष्टाचार की पोल खोली है। एक अप्रैल को गन्ना क्रय केंद्र के तौल लिपिक से 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते चीनी मिल के मुख्य गन्ना अधिकारी राजदीप बालियान को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इससे पहले मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के कार्यालय का एक कर्मचारी पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
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