6,200 चयनित बच्चों में आधे को भी नहीं मिला प्रवेश, इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने सरकार से की सख्त कार्रवाई की मांग
गाजियाबाद। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 के तहत चयनित बच्चों को निजी विद्यालयों द्वारा प्रवेश नहीं दिए जाने पर इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन (आईपीए) ने कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी ने ऐसे विद्यालयों के खिलाफ मान्यता रद्द करने सहित कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के शिक्षा अधिकार से खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीमा त्यागी ने कहा कि आरटीई अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना प्रत्येक मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद फरवरी से मार्च के बीच संपन्न हुई तीन चरणों की प्रवेश प्रक्रिया में चयनित करीब 6,200 बच्चों में से 50 प्रतिशत बच्चों को भी अब तक प्रवेश नहीं मिल सका है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के अधिकारी लगातार चयनित बच्चों के दाखिले सुनिश्चित कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जिले के कई बड़े निजी विद्यालय शासन और प्रशासन के निर्देशों की खुली अवहेलना कर रहे हैं। हाल ही में नवनियुक्त मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने भी निजी विद्यालयों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने की चेतावनी दी थी, लेकिन अनेक स्कूलों ने प्रशासनिक निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया।
संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन: सीमा त्यागी ने कहा कि आरटीई के अंतर्गत चयनित बच्चों को प्रवेश देने से इंकार करना केवल प्रशासनिक आदेशों की अवमानना नहीं है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21(क) के तहत बच्चों को प्राप्त मौलिक शिक्षा अधिकार का भी उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यालय जानबूझकर आरटीई के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश देने से मना करता है, तो उसके विरुद्ध मान्यता समाप्त करने, आर्थिक दंड लगाने तथा विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरकार से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग: इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि आरटीई कानून का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों की तत्काल समीक्षा कर उनके विरुद्ध मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि गरीब, वंचित और जरूरतमंद बच्चों को उनका संवैधानिक शिक्षा अधिकार सुनिश्चित हो सके तथा शिक्षा व्यवस्था में कानून का सम्मान कायम रहे। सीमा त्यागी ने कहा कि इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन बच्चों और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी मजबूती से आवाज उठाती रहेगी और आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
सरकार से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग: इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि आरटीई कानून का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों की तत्काल समीक्षा कर उनके विरुद्ध मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि गरीब, वंचित और जरूरतमंद बच्चों को उनका संवैधानिक शिक्षा अधिकार सुनिश्चित हो सके तथा शिक्षा व्यवस्था में कानून का सम्मान कायम रहे। सीमा त्यागी ने कहा कि इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन बच्चों और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आगे भी मजबूती से आवाज उठाती रहेगी और आरटीई के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
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