3,427 को परिवारों से मिलाया गया, नवजातों में ज्यादातर लड़कियां : जीपी भद्रदास
गाजियाबाद। जिले में पिछले छह वर्षों के दौरान बड़ी संख्या में लावारिस और परित्यक्त बच्चों के मामले सामने आए हैं। हालांकि, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की सक्रिय पहल से अधिकांश बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने में सफलता मिली है। वहीं, जिन बच्चों का परिवार नहीं मिल सका, उन्हें सुरक्षित संरक्षण, शिक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जा रहा है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के चेयरमैन जीपी भद्रदास ने बताया कि 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2025 के बीच गाजियाबाद में कुल 3,522 लावारिस बच्चे मिले। इनमें से 3,427 बच्चों को कड़ी मशक्कत के बाद उनके परिवारों से मिलवा दिया गया, जबकि पिछले चार वर्षों में 40 बच्चों को कानूनी प्रक्रिया के तहत गोद दिलाया गया। उन्होंने बताया कि लावारिस मिलने वाले नवजात शिशुओं में अधिकांश बालिकाएं होती हैं। कई मामलों में विवाह से पहले गर्भधारण होने पर नवजात को खुले स्थानों पर छोड़ दिया जाता है, जिससे उनकी जान को गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे बच्चों को सुरक्षित बचाना प्रशासन और समिति के लिए बड़ी चुनौती होती है।
भद्रदास ने लोगों से अपील की कि यदि किसी के सामने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो वह बच्चे को लावारिस छोड़ने के बजाय सीधे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से संपर्क करें। समिति अस्पताल से ही नवजात को अपने संरक्षण में ले लेगी, उसकी समुचित देखभाल करेगी और संबंधित व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि समिति केवल परित्यक्त नवजातों की ही नहीं, बल्कि उन बच्चों की भी देखभाल करती है, जिनके माता-पिता अलग हो चुके हैं और दोनों उन्हें अपने साथ रखने के इच्छुक नहीं हैं। इसके अलावा कोरोना महामारी के दौरान अनाथ हुए बच्चों का पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी भी समिति निभा रही है।
वर्तमान में गाजियाबाद में ऐसे बच्चों के लिए तीन बाल गृह संचालित हैं। एक गृह में शून्य से 10 वर्ष तक के बच्चों को रखा जाता है, जबकि दो अन्य गृहों में 10 वर्ष से अधिक आयु के लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। फिलहाल इन बाल गृहों में 12 बच्चे रह रहे हैं। समिति के अनुसार कई समाजसेवी संस्थाएं और स्कूल इन बच्चों की शिक्षा में सहयोग कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश का प्रतिष्ठित डलहौजी स्कूल भी कुछ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा कस्तूरबा विद्यालय और अटल विद्यालय में भी बच्चों का प्रवेश कराया जाता है।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने बताया कि समिति के संरक्षण में रह चुके कई बच्चों ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि एक बालिका वर्तमान में एक विश्वविद्यालय में फॉरेन रिलेशंस (अंतरराष्ट्रीय संबंध) की पढ़ाई कर रही है, जो अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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