नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के बीच बुधवार शाम रोहिणी सेक्टर-16 में निर्माणाधीन पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले में करीब 14 घंटे तक चले सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद राहत अभियान गुरुवार सुबह पूरा कर लिया गया है। इस हादसे में इमारत के मलबे में दबने से मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। लगातार हो रही बारिश, फिसलन व अंधेरे के कारण राहत एवं बचाव अभियान में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इमारत गिरने के बाद भवन के ढांचे और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
लगातार हो रही बारिश व रात के समय अंधेरा होने से मलबा हटाने का कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद विभिन्न एजेंसियों ने समन्वय के साथ पूरी रात अभियान जारी रखा। आसपास के अस्पतालों की एंबुलेंस भी मौके पर तैनात रखी गई थीं, जिससे घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जा सके। ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय पुलिस और सिविल डिफेंस के कर्मचारियों ने भी यातायात को नियंत्रित करने व राहत कार्य के लिए रास्ता खाली कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुबह पूरा हुआ सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन: दिल्ली फायर सर्विस के पीआरओ राजेन्द्र अटवाल के अनुसार गुरुवार सुबह करीब 6:45 बजे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया गया। जांच में मलबे के नीचे किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, एहतियात के तौर पर दमकल विभाग की एक वाटर टेंडर टीम को मौके पर तैनात रखा गया है, जो मलबा पूरी तरह हटाए जाने तक वहां मौजूद रहेगी। मलबा हटाने का काम चल रहा है।
हादसे को लेकर कई सवाल: अब प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है। प्रारंभिक तौर पर लगातार बारिश के बीच निर्माणाधीन इमारत की संरचनात्मक मजबूती को लेकर भी जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्माण कार्य निर्धारित सुरक्षा मानकों व भवन निर्माण नियमों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं. हादसे के बाद प्रशासन ने निर्माणाधीन व जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने के संकेत दिए हैं।हालांकि स्थानीय लोग इमारत में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग करने और नियमों को तक पर रखकर निर्माण करने का आरोप लगा रहे हैं। यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि बिल्डिंग का अवैध तरीके से अतिरिक्त निर्माण किया जा रहा था इसमें स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत भी हो सकती है.
लगातार हो रही बारिश व रात के समय अंधेरा होने से मलबा हटाने का कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद विभिन्न एजेंसियों ने समन्वय के साथ पूरी रात अभियान जारी रखा। आसपास के अस्पतालों की एंबुलेंस भी मौके पर तैनात रखी गई थीं, जिससे घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया जा सके। ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय पुलिस और सिविल डिफेंस के कर्मचारियों ने भी यातायात को नियंत्रित करने व राहत कार्य के लिए रास्ता खाली कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुबह पूरा हुआ सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन: दिल्ली फायर सर्विस के पीआरओ राजेन्द्र अटवाल के अनुसार गुरुवार सुबह करीब 6:45 बजे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा कर लिया गया। जांच में मलबे के नीचे किसी अन्य व्यक्ति के दबे होने की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि, एहतियात के तौर पर दमकल विभाग की एक वाटर टेंडर टीम को मौके पर तैनात रखा गया है, जो मलबा पूरी तरह हटाए जाने तक वहां मौजूद रहेगी। मलबा हटाने का काम चल रहा है।
हादसे को लेकर कई सवाल: अब प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहा है। प्रारंभिक तौर पर लगातार बारिश के बीच निर्माणाधीन इमारत की संरचनात्मक मजबूती को लेकर भी जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निर्माण कार्य निर्धारित सुरक्षा मानकों व भवन निर्माण नियमों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं. हादसे के बाद प्रशासन ने निर्माणाधीन व जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने के संकेत दिए हैं।हालांकि स्थानीय लोग इमारत में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग करने और नियमों को तक पर रखकर निर्माण करने का आरोप लगा रहे हैं। यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि बिल्डिंग का अवैध तरीके से अतिरिक्त निर्माण किया जा रहा था इसमें स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत भी हो सकती है.
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