10 लाख की की-प्रोग्रामिंग मशीन से सेकेंडों में बनाते थे डुप्लीकेट स्मार्ट-की, GPS ट्रैकर भी कर देते थे निष्क्रिय
नई दिल्ली। रोहिणी जिला पुलिस की स्पेशल स्टाफ टीम ने राजधानी दिल्ली और एनसीआर से हाई-एंड कारें चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए चार शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक की-प्रोग्रामिंग मशीनों की मदद से कुछ ही सेकेंड में लग्जरी कारों की डुप्लीकेट स्मार्ट-की तैयार कर बिना लॉक तोड़े वाहन चोरी कर लेते थे। इतना ही नहीं, वे वाहनों में लगे GPS ट्रैकिंग सिस्टम का पता लगाकर उसे भी निष्क्रिय कर देते थे, जिससे चोरी के बाद वाहन का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।रोहिणी के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) शशांक जायसवाल ने बताया कि जिले में लगातार बढ़ रही वाहन चोरी की घटनाओं को देखते हुए स्पेशल स्टाफ को सक्रिय किया गया था। कई दिनों तक तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
दिन में करते थे रेकी, रात में उड़ाते थे लग्जरी कारें: पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता था। गिरोह का सदस्य बलविंदर उर्फ बिंदा दिन के समय विभिन्न कॉलोनियों में घूमकर नई और महंगी कारों की रेकी करता था। वह ऐसे वाहनों को चिन्हित करता था, जिन्हें रात के समय आसानी से चोरी किया जा सके। इसके बाद वह वाहन की पूरी जानकारी गिरोह के सरगना कुलदीप सिंह उर्फ लक्की तक पहुंचाता था। कुलदीप अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत की-कटिंग मशीन, विशेष सॉफ्टवेयर, टैबलेट और इलेक्ट्रॉनिक प्रोग्रामिंग डिवाइस की मदद से कुछ ही सेकेंड में वाहन की डुप्लीकेट स्मार्ट-की तैयार कर देता था। इसके बाद बिना शीशा तोड़े और बिना लॉक क्षतिग्रस्त किए कार चोरी कर ली जाती थी। वारदात के दौरान आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फेस मास्क पहनते थे।
GPS ट्रैकर भी कर देते थे निष्क्रिय: पुलिस के अनुसार, गिरोह के पास अत्याधुनिक GPS डिटेक्टर भी मौजूद था। इसकी मदद से आरोपी चोरी किए जाने वाले वाहनों में लगे ट्रैकिंग सिस्टम का पता लगाकर उसे निष्क्रिय कर देते थे। इससे पुलिस के लिए वाहन की लोकेशन ट्रेस करना बेहद कठिन हो जाता था।
महंगी एसयूवी और लग्जरी कारों का होता था सौदा: चोरी के बाद महंगी एसयूवी और लग्जरी कारों को दूसरे राज्यों में सक्रिय रिसीवरों के माध्यम से बेच दिया जाता था। जिन वाहनों की बिक्री संभव नहीं होती थी, उन्हें गुप्त ठिकानों पर ले जाकर खोल दिया जाता था। इसके बाद इंजन, गियर बॉक्स, ईसीयू (ECU), अलॉय व्हील, हेडलाइट, दरवाजे और अन्य महंगे स्पेयर पार्ट्स निकालकर ग्रे मार्केट में अलग-अलग बेच दिए जाते थे। चोरी किए गए पार्ट्स की ढुलाई के लिए आरोपी चोरी के ऑटो का इस्तेमाल करते थे, ताकि किसी को शक न हो।
अलीपुर का हिस्ट्रीशीटर निकला गिरोह का सरगना: पुलिस के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड कुलदीप सिंह उर्फ लक्की (47) थाना अलीपुर का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ पहले से 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पुलिस ने इस मामले में कुलदीप सिंह उर्फ लक्की (47), बलविंदर उर्फ बिंदा (32), दीपक उर्फ देव (32) और बख्शीश सिंह उर्फ मन्नी (37) को गिरफ्तार किया है। इनमें दीपक चोरी की कारों को खरीदारों तक पहुंचाने का काम करता था, जबकि बख्शीश चोरी किए गए वाहनों को काटकर उनके स्पेयर पार्ट्स बेचने का काम करता था।
11 चोरी की कारें, ऑटो और हाईटेक उपकरण बरामद: पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 11 चोरी की लग्जरी कारें, एक चोरी का ऑटो, 50 इलेक्ट्रॉनिक डुप्लीकेट चाबियां, कंप्यूटरीकृत की-कटिंग मशीन, कंप्यूटर सिस्टम, टैबलेट, GPS डिटेक्टर, फर्जी नंबर प्लेट और अन्य हाईटेक उपकरण बरामद किए हैं। डीसीपी शशांक जायसवाल ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी की गाड़ियों को खरीदने वाले नेटवर्क की पहचान की जा रही है। पूछताछ के आधार पर वाहन चोरी के कई अन्य मामलों का भी खुलासा होने की संभावना है।
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