ट्राइसाइकिल बनी चलती-फिरती दुकान, विधायक-डीएम ने दिखाई हरी झंडी
गाजियाबाद। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल करते हुए 'मिशन समर्थ' के तहत मोटराइज्ड ट्राइसाइकिलों को चलती-फिरती दुकानों (मोबाइल शॉप) में परिवर्तित कर स्वरोजगार से जोड़ने की शुरुआत की है। योजना के प्रथम चरण में 50 दिव्यांगजनों को शुरुआती बिक्री सामग्री के साथ मोबाइल शॉप उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे वे बिना किसी अतिरिक्त निवेश के अपना व्यवसाय शुरू कर सकें। इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ मुरादनगर विधायक अजीत पाल, जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ तथा मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ ने फीता काटकर और हरी झंडी दिखाकर किया। इसके बाद लाभार्थी अपनी मोबाइल दुकानों के साथ नए रोजगार की शुरुआत के लिए रवाना हुए।
106 ट्राइसाइकिलों को मिला नया स्वरूप: जिला प्रशासन के अनुसार इससे पहले जिले के 106 दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिलें उपलब्ध कराई गई थीं। अब पहले चरण में इनमें से करीब 50 ट्राइसाइकिलों को विशेष ढांचे के साथ मोबाइल दुकानों में परिवर्तित किया गया है। प्रत्येक लाभार्थी को दुकान संचालन के लिए शुरुआती बिक्री सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि वे बिना अतिरिक्त खर्च के अपनी आजीविका शुरू कर सकें।सीएसआर के तहत मिला पांच लाख रुपये का सहयोग: इस परियोजना को साकार करने में मोहन मिकीन लिमिटेड, मोहन नगर ने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत पांच लाख रुपये का सहयोग दिया है। एक मोबाइल दुकान तैयार करने पर लगभग 10 हजार रुपये खर्च किए गए हैं, जिसमें ट्राइसाइकिल पर विशेष ढांचा तैयार करने के साथ शुरुआती बिक्री सामग्री भी शामिल है।
'आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज की पहचान': मुरादनगर विधायक अजीत पाल ने कहा कि यह पहल दिव्यांगजनों को सम्मानजनक स्वरोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने लाभार्थियों से ईमानदारी और मेहनत के साथ अपना व्यवसाय संचालित करने की अपील करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर नागरिक ही सशक्त समाज की नींव होते हैं।
'सहायता नहीं, स्थायी रोजगार देना लक्ष्य': जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को स्थायी स्वरोजगार और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी ऐसे नवाचारों के माध्यम से अधिक से अधिक दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
नींव शक्ति संस्थान की रही अहम भूमिका: जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने बताया कि इस परियोजना को सफल बनाने में नींव शक्ति संस्थान की संस्थापक ऋचा वल्लभ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संस्थान ने वेंडर के साथ समन्वय स्थापित कर ट्राइसाइकिलों को मोबाइल शॉप के रूप में तैयार कराया। 'मिशन समर्थ' को दिव्यांगजनों को सहायता पर निर्भर रखने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की एक प्रेरणादायक और प्रभावी पहल माना जा रहा है।गाजियाबाद,उत्तर प्रदेश: जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने मिशन समर्थ के तहत 50 दिव्यांगों को दुकान वाली ट्राइसाइकिल मिलने पर कहा, "मिशन समर्थ के माध्यम से पीड़ित व्यक्ति की पीड़ा में सहारा बना जाए और विकास के प्रयास करने का प्रयास किया जाता है। हमारे जो दिव्यांग भाई बहन है उनको आर्थिक… pic.twitter.com/EqfCWbLpdK
— IANS Hindi (@IANSKhabar) July 24, 2026
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