गाजियाबाद में चलती कार में भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार

लोनी, खोड़ा, नन्दग्राम, विजयनगर में अल्ट्रा साउंड सेंटर की बाढ़, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

गाजियाबाद। भ्रूण के लिंग परीक्षण पर कानूनी प्रतिबंध के बावजूद गाजियाबाद में चलती कार के अंदर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अवैध लिंग जांच कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संदीप, सलमान, तस्लीम और शाहिद को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी गर्भवती महिलाओं को तय स्थान पर बुलाकर वाहन के भीतर ही पोर्टेबल मशीन से भ्रूण का लिंग बताते थे। मामले की जांच जारी है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह गिरोह कब से सक्रिय था, किन-किन राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ था और इस अवैध कारोबार में अन्य कौन लोग शामिल हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले: गाजियाबाद में भ्रूण लिंग जांच के अवैध नेटवर्क का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2024 में भी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो कार के भीतर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से लिंग परीक्षण करता था। उस कार्रवाई में एक महिला एजेंट को गिरफ्तार किया गया था और अधिकारियों ने बताया था कि गिरोह लगातार अपना ठिकाना बदलकर कार्रवाई से बचने की कोशिश करता था। इसी तरह दिसंबर 2024 में लालकुआं क्षेत्र में एक अवैध केंद्र पर छापेमारी के दौरान भी भ्रूण लिंग परीक्षण कराने वाले गिरोह का खुलासा हुआ था। उस मामले में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर अल्ट्रासाउंड मशीन समेत कई उपकरण बरामद किए थे। 

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल: ताजा कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में भी एक मामले में छापेमारी के दौरान एक आरोपी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड उपकरण लेकर फरार हो गया था। वहीं लोनी, खोड़ा, नंदग्राम और विजयनगर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होने के बावजूद लगातार ऐसे मामलों का सामने आना निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। हाल के महीनों में हरियाणा की पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) टीमें गाजियाबाद में कई संयुक्त कार्रवाई कर चुकी हैं। एक मामले में हरियाणा की टीम ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पीसीपीएनडीटी टीम समय पर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने नहीं पहुंची, जिसके कारण मुख्य आरोपी को छोड़ना पड़ा। 

PCPNDT एक्ट के तहत कड़ी सजा का प्रावधान: भारत में प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्स (PCPNDT) अधिनियम के तहत भ्रूण के लिंग की जांच और इसकी जानकारी देना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून का उल्लंघन करने पर दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और कारावास का प्रावधान है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य एजेंट, दलाल और चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं तथा कितनी गर्भवती महिलाओं की अवैध लिंग जांच की गई।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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