बागपत: आशिकी में महंत ने मंदिर को बनाया कब्रिस्तान, बरामद हुई दो दोस्तों की लाश

चांदीनगर के लहचौड़ा गांव की वारदात, दो लापता युवकों की गुत्थी सुलझी, आरोपी महंत फरार

बागपत।
उत्तर प्रदेश के बागपत से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां के चांदीनगर थाना क्षेत्र के लहचौड़ा स्थित गणेश मंदिर परिसर में बुधवार देर रात दो शव जमीन में दबे मिले। ये दोनों दोस्त 25 जुलाई से लापता थे. पुलिस के पहुंचने से पहले ही महंत फरार हो गया, जबकि उसके दो शिष्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के मुताबिक सिंगोली तगा गांव में बीस दिन से लापता दिव्यांग अंकुर (25) और उसके दोस्त इसरार (32) की हत्या महंत ने ही कराई और दोनों के शव मंदिर परिसर में गड़वा दिए। पुलिस ने एक आरोपित उज्ज्वल पांचाल की निशानदेही पर गुरुवार सुबह दोनों शव बरामद कर लिए। दोनों की हत्या पुजारी नरेश नाथ निवासी काशीपुर उत्तराखंड ने अपने नाबालिग करीबी और दो अन्य के साथ मिलकर 25 जुलाई को करवा दी थी। पुलिस का कहना है कि पूरी वारदात महंत के  प्रेम प्रसंग की वजह से हुई।
शुरुआती जांच में पता चला कि सिंगोली तगा में रहने वाले दिव्यांग अंकित की बहन का महंत से प्रेम प्रसंग था। बीती 25 जुलाई को अंकित अपने दोस्त इसरार के साथ महंत को समझाने के लिए मंदिर पहुंचा था। वहाँ विवाद बढ़ने पर महंत ने दोनों की हत्या कर दी और उनके शवों को मंदिर परिसर में ही पीछे की तरफ दफना दिया। तभी से गाँव वालों की नजर में अंकित और इसरार लापता थे। परिवार वालों ने थाना चांदी नगर में 29 जुलाई को दोनों की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस को लगा कि दोनों कहीं घूमने गए हैं इसलिए पुलिस ने गुमशुदगी को गंभीरता से नहीं लिया। एक सप्ताह बाद भी जब दोनों का पता नहीं चला तो पुलिस हरकत में आई।
ऐसे हुआ खुलासा:
पुलिस ने कॉल डिटेल, आखिरी लोकेशन और गांव के लोगों से पूछताछ की तो लहचौड़ा स्थित गणेश मंदिर के महंत नरेश नाथ का नाम सामने आया। जांच में पता चला कि दोनों आखिरी बार गणेश मंदिर के आसपास देखे गए थे। पुलिस को महंत और अंकित की बहन के बीच अफेयर की भी जानकारी मिली। पुलिस ने बुधवार रात मंदिर में छापा मारा, लेकिन इसकी भनक महंत नरेश नाथ को लग गई और वह भाग गया। पुलिस को मंदिर में उसके दो शिष्य कृष्ण यादव और उज्ज्वल मिले। पूछताछ में दोनों शुरुआत में पुलिस को बरगलाते रहे, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर टूट गए। दोनों ने कबूल किया कि महंत ने दोनों युवकों की हत्या की थी। उन्होंने बताया कि शव मंदिर के पीछे दफनाए गए हैं। किसी को शक न हो, इसलिए ऊपर से टाइल्स (सीमेंटेड ईंट) लगवा दीं। पुलिस ने रात 3 बजे खुदाई कर दोनों शव बरामद कर लिए।कपड़े-घड़ी से दोनों की पहचान हुई। 
दो परिवारों में मचा कोहराम:
19 दिन बाद दोहरे हत्याकांड के खुलासे से दोनों के परिवार में कोहराम मच गया है। सिगोली तगा गांव में अंकित मां और 5 बहनों के साथ रहता था। वह घर का इकलौता बेटा था। दो बहनों की शादी हो चुकी है। अंकित अविवाहित और बेरोजगार था। अंकित के घर के ठीक सामने इसरार का मकान है। इसरार मजदूरी करके परिवार चलाता था। उसके परिवार में पत्नी फिरदौस और तीन बच्चे हैं। बेटी इसरा 6 साल की है, जबकि बेटे आयान की उम्र 5 साल और फैजान की उम्र 3 साल है। इन बच्चों के सिर से पिता का साया हट गया है।
अंकित की बहन से महंत का अफेयर, समझाने-धमकाने गए थे: इसरार के भाई फरीद ने बताया- अंकित की बहन का महंत नरेश नाथ से अफेयर था। दोनों कई बार उसे समझा चुके थे, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था। 25 जुलाई को भी दोनों महंत को समझाने और धमकाने के इरादे से मंदिर गए होंगे। वहीं उनकी हत्या कर दी गई। गुरुवार तड़के पुलिस ने फोन करके इसरार की हत्या की जानकारी दी। इसके बाद शव की शिनाख्त करवाई गई।
गांव वालों ने एक साल पहले महंत को गांव से निकाल दिया था:  एसपी सूरज राय ने कहा- बहन से अफेयर के विरोध में ही दोनों युवकों की हत्या की बात सामने आ रही है। महंत एक साल पहले गांव में अंकित के पड़ोस में रहता था और पूजा-पाठ कराता था। लेकिन उसका चाल-चलन ठीक नहीं था। इसके चलते ग्रामीणों ने उसे गांव से निकाल दिया था। इसके बाद वह गांव से दो किमी दूर मंदिर में अपने दो शिष्यों के साथ रहने लगा था। उसका 14 साल का बेटा भी कुछ दिन पहले उत्तराखंड से घूमने आया था। वह भी लापता है।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने