दिव्यांग बंदियों को योजनाओं की जानकारी के साथ बांटे गए सहायक उपकरण
गाजियाबाद। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ के निर्देशन में मंगलवार को डासना जिला कारागार में दिव्यांग बंदियों के पुनर्वास, सामाजिक सशक्तिकरण और उन्हें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता एवं सहायता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी गाजियाबाद डॉ. सचिन वैश्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी हापुड़, जेल अधीक्षक डासना जिला कारागार सीताराम शर्मा, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी गाजियाबाद अंशुल चौहान सहित चिकित्सा विभाग की टीम और कारागार प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान ने दिव्यांग बंदियों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन पेंशन योजना, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना, स्वरोजगार एवं पुनर्वास योजनाओं, दुकान एवं कियोस्क आवंटन सहित अन्य रोजगारपरक योजनाओं का लाभ पात्र दिव्यांगजन उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कारागार से रिहाई के बाद दिव्यांग बंदी इन योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं।
दिव्यांग बंदियों को बांटे गए सहायक उपकरण: कार्यक्रम के दौरान दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से पात्र दिव्यांग बंदियों को श्रवण यंत्र (हियरिंग एड) और बैसाखियों का वितरण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन उपकरणों से दिव्यांग बंदियों को दैनिक जीवन में काफी सहायता मिलेगी।
यूडीआईडी कार्ड और प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया समझाई: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सचिन वैश्य के नेतृत्व में चिकित्सा विभाग की टीम ने दिव्यांग प्रमाणपत्र और यूडीआईडी (UDID) कार्ड बनवाने की प्रक्रिया की जानकारी दी। जिन दिव्यांग बंदियों के प्रमाणपत्र और यूडीआईडी कार्ड नहीं बने थे, उनके दस्तावेज एकत्र किए गए, ताकि नियमानुसार जल्द से जल्द प्रमाणपत्र जारी कराया जा सके।
रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर: जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने कहा कि कारागार से रिहा होने वाले दिव्यांग बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने दिव्यांग बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
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