दिल्ली-गाजियाबाद से गाड़ियां उड़ाकर बिहार में खपाते थे बदमाश, क्राइम ब्रांच ने गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को दबोचा
गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर में चार पहिया वाहन चोरी कर उन्हें दूसरे राज्यों में खपाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। क्राइम ब्रांच और थाना लिंक रोड पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से गाजियाबाद और दिल्ली से चोरी की गई चार कारें तथा फर्जी नंबर प्लेट बरामद की गई हैं।
सहायक पुलिस आयुक्त अपराध अमित सक्सेना के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धीरज कुमार उर्फ राहुल अरोड़ा निवासी राजवंशी नगर शास्त्री नगर पटना बिहार और प्रिन्स कुमार निवासी ग्राम सराय मनुआ वैशाली बिहार के रूप में हुई है। दोनों की उम्र क्रमशः 27 और 24 वर्ष बताई गई है।
डिमांड के हिसाब से दिल्ली-एनसीआर से चुराते थे कारें: पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका एक संगठित गिरोह है, जो दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में चार पहिया वाहनों की चोरी करने और चोरी के वाहनों की खरीद-फरोख्त में सक्रिय है। गिरोह में बिहार और दिल्ली के कई अन्य सदस्य भी शामिल हैं। आरोपियों के मुताबिक, गिरोह वाहन की मांग के अनुसार गाजियाबाद और दिल्ली-एनसीआर से कारें चोरी करता था। इसके बाद चोरी किए गए वाहनों को दूसरे स्थानों पर ले जाकर अच्छी कीमत पर बेच दिया जाता था। वाहन बेचने से होने वाले मुनाफे को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
गिरोह के तीन सदस्य पहले ही जा चुके हैं जेल: पुलिस के अनुसार इस गिरोह के तीन अन्य सदस्यों को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इनमें राजू उर्फ राजकुमार, गुड्डू कुमार और छोटू कुमार शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से भी चोरी की कारें बरामद की थीं। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि छोटू कुमार गिरोह का प्रमुख सदस्य है, जबकि गुड्डू कुमार और अन्य आरोपी चोरी और वाहनों की खरीद-फरोख्त के नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाते थे।
चार चोरी की कारें बरामद: पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से थाना इंदिरापुरम, थाना लिंक रोड और थाना पश्चिम विहार दिल्ली से चोरी 3 क्रेटा कार तथा थाना केएन काटजू मार्ग दिल्ली से चोरी वैगनआर कार, इसके अलावा फर्जी नंबर प्लेट भी बरामद की गई हैं। पुलिस की कार्रवाई से साफ हुआ है कि गिरोह दिल्ली-एनसीआर में वाहन चोरी करने के बाद उन्हें दूसरे राज्यों में खपाने के नेटवर्क पर काम कर रहा था। चोरी के वाहनों की पहचान छिपाने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, चोरी की कारों को खरीदने वालों और वाहनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।
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