दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच हुए ड्राइविंग टेस्ट जांच के दायरे में; डमी कैंडिडेट, फेस रिकग्निशन और कैमरा रिकॉर्डिंग में छेड़छाड़ की आशंका, कर्मचारियों से दलालों तक मचा हड़कंप
गाजियाबाद। गुलधर स्थित ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेनिंग टेस्ट सेंटर (ADTTC) से ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और धांधली की आशंका ने परिवहन विभाग में हड़कंप मचा दिया है। खबर के मुताबिक शासन ने दिसंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच हुए करीब 32 हजार से अधिक ड्राइविंग टेस्टों की जांच के आदेश दिए हैं। शासन स्तर पर आशंका जताई गई है कि दलालों और सेंटर से जुड़े कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से कुछ मामलों में असली आवेदकों की जगह डमी कैंडिडेट को ड्राइविंग टेस्ट में बैठाया गया हो सकता है। इसके अलावा कैमरा रिकॉर्डिंग, फेस रिकग्निशन और बायोमीट्रिक व्यवस्था में छेड़छाड़ की आशंका भी जांच के दायरे में है।
असली आवेदक की जगह एक्सपर्ट ड्राइवर बैठाने का शक: प्रारंभिक आशंकाओं के मुताबिक, कुछ आवेदकों को टेस्ट पास कराने के लिए उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति से ऑटोमेटेड ट्रैक पर वाहन चलवाया गया हो सकता है। माना जा रहा है कि डमी कैंडिडेट की पहचान छिपाने के लिए कैमरे के एंगल, फेस-रीडिंग अथवा बायोमीट्रिक प्रक्रिया में कथित हेरफेर की गई हो सकती है। ADTTC में ड्राइविंग टेस्ट ऑटोमेटेड ट्रैक पर होता है। ऐसे में जांच का मुख्य सवाल यह है कि यदि किसी आवेदक ने वास्तव में ड्राइविंग टेस्ट नहीं दिया, तो वह सिस्टम में टेस्ट पास कैसे हुआ और उसके नाम पर ड्राइविंग लाइसेंस कैसे जारी हुआ।
कैमरे से लेकर कंप्यूटर सिस्टम तक जांच: मामले में फर्जीवाड़े के संभावित तरीकों को लेकर भी जांच की जा रही है। इसमें कैमरे के एंगल या फेस रिकग्निशन में कथित हेरफेर, डमी ड्राइवर से वाहन चलवाना, कंप्यूटर-सिम्युलेटर टेस्ट में अनियमितता और सिस्टम के बैकएंड में संभावित छेड़छाड़ जैसे पहलू शामिल हैं। इसके अलावा आवेदकों के बायोमीट्रिक डेटा और टेस्ट रिकॉर्ड का भी मिलान किया जा सकता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि टेस्ट देने वाला व्यक्ति वही था या नहीं, जिसके नाम पर लाइसेंस जारी किया गया।
गड़बड़ी मिली तो दर्ज होगी एफआईआर: खबर के मुताबिक शासन के निर्देश के बाद जिला आरटीओ विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यदि किसी कर्मचारी, सेंटर से जुड़े व्यक्ति या अन्य किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, गड़बड़ी साबित होने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। जांच की खबर से परिवहन विभाग के कर्मचारियों से लेकर कथित दलालों तक में हड़कंप मचा हुआ है। यहां काबिलेगौर है कि इससे पहले सहारनपुर में भी इसी तरह के ऑटोमेटेड टेस्ट सेंटर पर धांधली और धांधलेबाजी के आरोप लगे थे, जिसके बाद जाच में गड़बड़ी मिलने पर वहां की व्यवस्था को बंद कर दिया गया था। गाजियाबाद सेटर पर भी जब अचानक पास होने वाले आवेदको की बाढ़ आ गई, तो शासन के कान खड़े हुए। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि 32 हजार से अधिक ड्राइविंग टेस्टों में कहीं नियमों की अनदेखी, फर्जीवाड़े या सिस्टम से छेड़छाड़ कर अयोग्य आवेदकों को लाइसेंस तो जारी नहीं किए गए।
Tags
गाजियाबाद