दिल्ली में 753 अवैध इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश

सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी के सभी जोन में खतरनाक और जर्जर भवनों को चिन्हित करने का अभियान तेज 

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने खतरनाक, जर्जर और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। निगम की 8 सितंबर 2026 की डेली एक्शन टेकन रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में अब तक 753 संपत्तियों के ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इनमें अकेले सितंबर के पहले आठ दिनों में 66 संपत्तियां शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से 31 अगस्त 2026 के बीच 687 संपत्तियों के ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद 1 से 8 सितंबर के बीच 66 और आदेश जारी हुए। इस तरह 8 सितंबर तक ध्वस्तीकरण आदेशों की कुल संख्या 753 पहुंच गई है। एमसीडी की कार्रवाई केवल नोटिस और आदेश जारी करने तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 8 सितंबर के बीच 1,007 संपत्तियों में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। इसी अवधि में 471 संपत्तियों को सील किया गया है। अनधिकृत निर्माण के खिलाफ निगम ने इस दौरान 1,551 शो-कॉज नोटिस जारी किए, जबकि सीलिंग से संबंधित 714 नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, 8 सितंबर को ही निगम ने 17 संपत्तियों में ध्वस्तीकरण कार्रवाई, पांच संपत्तियों को सील करने और 15 ध्वस्तीकरण आदेश जारी करने की जानकारी दी है।
खतरनाक भवनों की हो रही पहचान: सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी ने सभी जोन के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में खतरनाक और जर्जर भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे भवनों को उनके जोखिम के स्तर के आधार पर चिन्हित और वर्गीकृत किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। निगम की विशेष निगरानी पीजी, स्कूल, होटल और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों पर है, जहां बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही या रहने की व्यवस्था होती है।
ब्रह्मपुरी में अवैध निर्माण सील: उत्तर-पूर्वी जोन में निगम की टीम ने ब्रह्मपुरी की पांडव गली नंबर-8 स्थित एक मकान में चल रहे कथित अवैध निर्माण को रुकवा दिया। निगम ने चार मंजिल से ऊपर किए जा रहे निर्माणाधीन हिस्से को सील कर दिया। यह कार्रवाई स्थानीय निवासी करीब 65 वर्षीय शीशपाल तिवारी की शिकायत के बाद की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पड़ोसी मकान में लगातार निर्माण कार्य होने के कारण उनके घर की दीवारों में दरारें आ गई हैं और सीलन की समस्या भी बढ़ गई है। तिवारी के मुताबिक, उन्होंने मामले की शिकायत निगम अधिकारियों से की थी। उनका दावा है कि निगम की ओर से निर्माण कार्य रोकने का नोटिस दिए जाने के बावजूद निर्माण जारी रखा गया। उन्होंने 30 जून को निगम और 2 जुलाई को थाना न्यू उस्मानपुर में शिकायत देकर निर्माण कार्य रुकवाने और संबंधित विभागों से हस्तक्षेप की मांग की थी।
पीजी, स्कूल और होटल भी निगरानी के दायरे में: एमसीडी ने सभी जोनल उपायुक्तों को अपने क्षेत्रों में खतरनाक और जर्जर भवनों की पहचान कर उनका जोखिम के आधार पर वर्गीकरण करने के निर्देश दिए हैं। जरूरत के मुताबिक ऐसे भवनों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा पीजी के साथ स्कूल, होटल और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े भवनों का भी निरीक्षण किया जाना है। एमसीडी आयुक्त संजीव खिरवार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मानव जीवन की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाए। निगम का जोर हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय खतरे की पहले पहचान कर उसे रोकने पर है।
इसी दिशा में लक्ष्मी नगर और शकरपुर में शुरू किए गए पीजी सर्वे को भी अहम माना जा रहा है। सर्वे के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन इलाकों में कितने पीजी संचालित हैं, उनमें से कितने नियमों के अनुरूप हैं और कितने भवनों में सुरक्षा अथवा निर्माण संबंधी खामियां हैं। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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