गाजियाबाद में क्या ट्रैफिक पुलिस पर हावी हो रहा अवैध ऑटो सिंडिकेट?

जरा सी गलती करने वालों के भी हो रहे चालान तो फिर कबाड़ गाड़ियों को क्यों मिल रहा अभयदान ? 15 साल पुराने विक्रम/ऑटो से लाखों की अवैध वसूली: सूत्र

सुमित शर्मा
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गाजियाबाद।  एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान आयु सीमा पूरी कर चुके एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहनों को निरुद्ध अथवा जब्त कर नियमानुसार पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों के माध्यम से स्क्रैप कराने पर जोर दिया जा रहा है और इसी के तहत गाजियाबाद में भी वाहन जब्त कर स्क्रैपिंग के लिए भेजे जाने की कवायद जारी है। इस बीच गाजियाबाद में सड़कों पर नियम-कानून को ताक पर रखकर 15 साल पुराने ऐसे 'विक्रम' ऑटो यमदूत बनकर अब भी दौड़ रहे हैं जिनको स्क्रैप में होना चाहिए था, वे धड़ल्ले से सवारियां ढो रहे हैं। मियाद पूरी कर चुके वाहनों का संचालन यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ा रहा है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल के पीछे हर महीने लाखों रुपये की अवैध उगाही का एक सुनियोजित सिंडिकेट काम कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि हर चौराहे-तिराहे पर खड़े ट्रैफिक पुलिसवाले ट्रैफिक रूल्स का उल्लंघन करने वाले कार-मोटरसाइकिल का चालान कर देते हैं वहीं अवैध रूप से सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ते पुराने ऑटो पर कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। यहां तक इन वाहनों के परमिट और फिटनेस जैसे दस्तावेजों की जांच तक नहीं की जाती।
जिले में अलग-अलग रूटों पर 15 साल से पुराने विक्रम ऑटो नियमों को ठेंगा दिखाते हुए बेरोक-टोक दौड़ रहे हैं और पूरे सिस्टम को चुनौती देते नजर आते हैं। प्रत्येक रूट पर इन ऑटो से अवैध उगाही की जाती है। इस अवैध उगाही का जिम्मा प्राइवेट लड़के संभालते हैं। इस गुंडा टैक्स की वसूली को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं, यहां तक कि कुछ रूटों पर ऑटो वालों ने ही इस पर आपत्ति जाहिर की थी लेकिन गुंडा टैक्स की वसूली बन्द नहीं हुई। इस अवैध उगाही में लिप्त कुछ प्राइवेट लड़के तो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बताए जाते हैं और पहले जेल भी जा चुके हैं।
हफ्ता वसूली की दर:
सूत्रों की मानें तो हर 15 साल पुराने और बिना कागजात वाले वाहन से प्रति माह 1,000 रूपए की अवैध वसूली की जाती रही है। सवाल उठता है कि कथित गुंडा टैक्स की अदायगी से ही क्या मियाद पूरी कर चुके विक्रम/ऑटो को सड़क पर दौड़ने की इजाजत मिल सकती है। अलग-अलग रूटों पर चलने वाले विक्रम/ऑटो के वैध दस्तावेजों की ही जांच कर ली जाए तब भी बड़ी कमियां सामने आ सकती हैं।
रूट्स पर दबदबा: जिले में आनंद विहार से मोहननगर, साहिबाबाद, डाबर, वैशाली, महाराजपुर, और मोहननगर मेट्रो स्टेशन से इंदिरापुरम होते हुए सेक्टर-62 तक यह सिंडिकेट पूरी तरह सक्रिय है। इन रूटों पर गुंडा टैक्स की वसूली के दम पर 15 साल पुराने ऑटो का संचालन होते देखा जा सकता है। नया बस अड्डा से मोदीनगर और विजयनगर-छिजारसी रूट पर ईको और ऑटो में क्षमता से दोगुनी सवारियां भूसे की तरह भरी जाती हैं।
जाम का सबब: शहीद स्थल (नया बस अड्डा) मेट्रो स्टेशन के नीचे ई-रिक्शा की अवैध लाइनें लगवाकर सवारियां भरवाई जाती हैं, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे नजारे अलग-अलग रूट पर भी आसानी से देखने को मिल जाते हैं जहां अवैध ऑटो के जमघट की वजह से जाम लगा रहता है। 
सवाल तो ट्रैफिक इंस्पेक्टर (टीआई) की सजगता पर भी: 
जिले में अलग-अलग रूट पर जिस तरह से बिना रोक टोक पुराने/कबाड़ हो चुके ऑटो सड़क हादसों को न्यौता देते हुए दौड़ते हैं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती, उससे तो संबंधित ट्रैफिक इंस्पेक्टर (टीआई) की सजगता भी पर सवाल खड़े होते हैं। क्या यह संभव है कि मुख्य मार्गों पर खुलेआम दौड़ रहे सैकड़ों अवैध ऑटो की जानकारी टीआई को न हो? यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि जिन वाहन चालकों के कागजात पूरे हैं, उनके भारी चालान जरा सी गलती पर काट दिए जाते हैं वहीं दूसरी ओर हफ्ता वसूली सिंडिकेट को 1,000 रूपए महीना देने वाले कबाड़ ऑटो को अभयदान क्यों मिला हुआ है। जांच का विषय तो यह भी है कि अवैध उगाही किस तिजोरी में जमा हो रही है और किस स्तर पर इसका बंदरबांट किया जा रहा है? विभाग के आलाधिकारी इसकी निष्पक्ष जांच करा दें तो दूध का दूध और पानी का पानी भी हो जाएगा और कई चेहरे भी बेनकाब हो जाएंगे।
बड़े हादसे का इंतजार क्यों?: इन खटारा और मियाद पूरी कर चुकी गाड़ियों में रोजाना हजारों महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सफर करते हैं। बिना फिटनेस और बिना कागजात के दौड़ रहे इन वाहनों के कारण कभी भी कोई भीषण हादसा हो सकता है। किसी दुर्घटना की स्थिति में इन अनधिकृत वाहनों के यात्रियों को कोई बीमा या कानूनी मदद भी नहीं मिल पाएगी। कुल मिलाकर संबंधित उच्चाधिकारी इन हालातों का संज्ञान लेते हुए मियाद पूरी कर चुके ऑटो को जब्त कराने के साथ ही वाहन संबंधी परमिट, फिटनेस आदि दस्तावेजों की जांच कराएं तो पूरी हकीकत सामने आ जाएगी।अवैध वसूली सिंडिकेट के आकाओं और उनके संरक्षणदाताओं पर कार्रवाई करने की जरूरत है। ताकि सरकार की स्क्रैप पाॅलिसी का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन हो सके।

ALERT AFSARSHAHI

-विनोद कुमार यादव, संपादक Email:alertafsarshahi@gmail.com "अलर्ट अफसरशाही" राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित हिन्दी मासिक पत्रिका है जो शासन-प्रशासन द्वारा संचालित योजनाओं का प्रचार करने के साथ ही अधिकारी वर्ग द्वारा किए जाने वाले सराहनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रकाशित करती है। पत्रिका में स्वास्थ्य एवं शिक्षा से संबंधित विषयों पर जानकारी परक लेख-आलेख विशेष रूप से सम्मिलित किए जाते हैं।

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